नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के उन नेताओं में हैं, जिनका राजनीतिक सफर चार दशक से भी ज्यादा लंबा रहा है। वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद राजनीति में आए और धीरे-धीरे बिहार से लेकर केंद्र की राजनीति तक अपनी जगह बनाई। लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रहने के बाद अप्रैल 2026 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया और राज्यसभा सांसद के रूप में नई राजनीतिक भूमिका संभाली। फिलहाल वे जनता दल (यूनाइटेड) यानी JD(U) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
नीतीश कुमार का जीवन सिर्फ मुख्यमंत्री बनने तक सीमित नहीं रहा। छात्र जीवन, जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़ाव, शुरुआती चुनावी हार, केंद्र में मंत्री की जिम्मेदारी, रेल मंत्री के तौर पर काम और बिहार की सत्ता में कई बार वापसी—उनके राजनीतिक जीवन में कई अलग-अलग पड़ाव रहे हैं।
नीतीश कुमार का जन्म और शुरुआती जीवन
नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के बख्तियारपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम कविराज राम लखन सिंह और मां का नाम परमेश्वरी देवी था। उनके पिता आयुर्वेद से जुड़े थे और सामाजिक तथा राजनीतिक गतिविधियों में भी उनकी रुचि थी। नीतीश का पैतृक संबंध नालंदा जिले के कल्याण बिगहा से रहा है।
बख्तियारपुर में ही उनकी शुरुआती पढ़ाई हुई। इसके बाद वे पटना पहुंचे और बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। यही संस्थान आगे चलकर एनआईटी पटना के नाम से जाना गया। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उपलब्ध सरकारी और संसदीय रिकॉर्ड में उनकी शैक्षणिक योग्यता B.Sc. (Engineering) दर्ज है, जबकि कई जीवनी स्रोत उनकी पढ़ाई को इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग बताते हैं।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में काम भी किया, लेकिन नौकरी में उनका मन ज्यादा समय तक नहीं लगा। उस समय देश में राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं और बिहार में भी छात्र आंदोलन का असर दिखाई दे रहा था। इसी माहौल में नीतीश कुमार का रुख राजनीति की तरफ बढ़ा।
जयप्रकाश आंदोलन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन पर जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का गहरा असर रहा। 1970 के दशक में वे जेपी आंदोलन से जुड़े। इसी दौर में उनकी मुलाकात कई ऐसे नेताओं से हुई, जो आगे चलकर बिहार और देश की राजनीति में बड़े नाम बने। लालू प्रसाद यादव, सुशील कुमार मोदी और दूसरे समाजवादी नेताओं के साथ भी उनका राजनीतिक संपर्क इसी दौर में मजबूत हुआ।
शुरुआत आसान नहीं रही। 1977 और 1980 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने हरनौत से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने राजनीति नहीं छोड़ी। 1985 में हरनौत से उन्हें पहली चुनावी सफलता मिली और वे बिहार विधानसभा के सदस्य बने।
1987 में वे युवा लोक दल, बिहार के अध्यक्ष बने। इसके बाद 1989 में वे बिहार में जनता दल के महासचिव बने और उसी साल पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए। यह उनके राष्ट्रीय राजनीतिक सफर की शुरुआत थी।
केंद्र की राजनीति में नीतीश कुमार
1989 में लोकसभा पहुंचने के बाद नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो गए। वीपी सिंह सरकार में उन्हें कृषि और सहकारिता राज्य मंत्री बनाया गया। 1991 में वे दोबारा लोकसभा पहुंचे। इसके बाद 1996, 1998, 1999 और 2004 में भी वे लोकसभा के लिए चुने गए। उनका लंबे समय तक प्रमुख संसदीय क्षेत्र बाढ़ रहा, जबकि 2004 में उन्होंने नालंदा से भी जीत दर्ज की।
1994 में उन्होंने जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर समता पार्टी बनाई। उस समय बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव का प्रभाव काफी मजबूत था। नीतीश कुमार ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश की। आगे चलकर समता पार्टी का राजनीतिक रास्ता बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के साथ जुड़ा। 2003 में समता पार्टी और शरद यादव के नेतृत्व वाले जनता दल के एक धड़े का विलय हुआ और जनता दल (यूनाइटेड) यानी JD(U) का गठन हुआ।
रेल मंत्री के तौर पर नीतीश कुमार
केंद्र सरकार में नीतीश कुमार को रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी भी मिली। 1998 में वे रेल मंत्री बने। इसके अलावा उन्होंने कृषि और सतह परिवहन जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली। बाद में 2001 से 2004 तक वे फिर रेल मंत्री रहे।
रेल मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल को लेकर खास तौर पर रेलवे टिकटिंग से जुड़े बदलावों का जिक्र मिलता है। इंटरनेट टिकट बुकिंग और तत्काल टिकट जैसी सुविधाओं के विस्तार को उनके कार्यकाल की प्रमुख पहलों में गिना जाता है।
1999 में पश्चिम बंगाल के गैसल में हुए रेल हादसे के बाद नीतीश कुमार ने रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था। उस समय उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने की बात कही थी।
पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री कब बने?
नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को बिहार के मुख्यमंत्री बने। उस समय विधानसभा में उनके पास बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी। करीब एक सप्ताह बाद 10 मार्च 2000 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनका यह पहला मुख्यमंत्री कार्यकाल बहुत छोटा रहा।
इसके बाद वे कुछ समय तक केंद्र की राजनीति में रहे। लेकिन बिहार की राजनीति में उनकी सक्रियता बनी रही। 2005 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक जीवन में बड़ा मोड़ लेकर आया। NDA के साथ चुनाव लड़ने के बाद नीतीश कुमार ने नवंबर 2005 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
2005 के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा दौर
नवंबर 2005 में नीतीश कुमार दोबारा बिहार के मुख्यमंत्री बने। इस बार उनका कार्यकाल लंबा रहा। 2010 के विधानसभा चुनाव में भी NDA को सफलता मिली और नीतीश कुमार फिर मुख्यमंत्री बने। उनके शासन के इस दौर में सड़क, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी सेवाओं से जुड़े कई कामों पर जोर दिया गया।
इसी समय उनकी राजनीतिक पहचान बिहार में विकास और प्रशासन से जुड़े मुद्दों के साथ मजबूत हुई। सरकार ने लड़कियों की शिक्षा और स्कूल जाने के लिए साइकिल योजना जैसी पहलों पर भी काम किया। हालांकि बिहार में उनके शासन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं की अलग-अलग राय रही है। इसलिए उनके कार्यकाल का आकलन करते समय उपलब्ध सरकारी आंकड़ों और अलग-अलग स्रोतों को देखना जरूरी है।
बीजेपी से अलग होने से लेकर महागठबंधन तक
2013 में नीतीश कुमार ने बीजेपी से अपना पुराना गठबंधन तोड़ दिया। इसके पीछे नरेंद्र मोदी को बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर राजनीतिक मतभेद प्रमुख वजहों में बताए गए। इसके बाद बिहार में उनकी सरकार ने अलग रास्ता अपनाया।
2014 के लोकसभा चुनाव में JD(U) के खराब प्रदर्शन के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद जीतन राम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह व्यवस्था ज्यादा समय नहीं चली और 2015 में नीतीश कुमार दोबारा मुख्यमंत्री पद पर लौट आए।
2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव की RJD और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा। गठबंधन को बहुमत मिला और नीतीश कुमार फिर मुख्यमंत्री बने। उस समय तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बने थे।
2017 में फिर बदला राजनीतिक गठबंधन
2017 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर नई सरकार बनाई और एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। यह बदलाव बिहार की राजनीति में काफी चर्चा में रहा।
2020 के विधानसभा चुनाव में JD(U) और बीजेपी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा। NDA को सरकार बनाने का मौका मिला और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने रहे। इस चुनाव में बीजेपी की सीटें JD(U) से ज्यादा थीं, लेकिन गठबंधन के फैसले के अनुसार नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया।
2022 में फिर RJD के साथ सरकार
अगस्त 2022 में नीतीश कुमार ने बीजेपी से गठबंधन खत्म कर दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और RJD, कांग्रेस तथा दूसरे दलों के साथ मिलकर नई सरकार बनाई। इसके बाद तेजस्वी यादव फिर उपमुख्यमंत्री बने।
यह सरकार करीब डेढ़ साल चली। जनवरी 2024 में नीतीश कुमार ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और NDA में वापस जाने का फैसला किया। इसके बाद बीजेपी के समर्थन से उन्होंने दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
नीतीश कुमार कितनी बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे?
नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद पर आना-जाना कई बार हुआ। अलग-अलग कार्यकालों को अलग गिना जाए तो वे कुल 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। उनका पहला कार्यकाल मार्च 2000 में केवल कुछ दिनों का था। इसके बाद 2005 से 2014 तक, फिर 2015 से 2017, 2017 से 2022, 2022 से 2024 और 2024 से 2026 तक वे अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में मुख्यमंत्री रहे।
| समय | पद |
|---|---|
| 1985 | पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य |
| 1989 | पहली बार लोकसभा सांसद |
| 1990 | केंद्र में राज्य मंत्री |
| 1998-2004 | केंद्र में रेल, कृषि और सतह परिवहन से जुड़ी जिम्मेदारियां |
| मार्च 2000 | पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री |
| नवंबर 2005 | दोबारा मुख्यमंत्री |
| 2010 | तीसरी बार मुख्यमंत्री |
| 2015 | फिर मुख्यमंत्री |
| 2017 | बीजेपी के साथ सरकार बनाकर मुख्यमंत्री |
| 2020 | फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ |
| 2022 | RJD के साथ नई सरकार में मुख्यमंत्री |
| 2024 | NDA के साथ फिर मुख्यमंत्री |
| 2026 | मुख्यमंत्री पद छोड़ा, राज्यसभा पहुंचे |
नीतीश कुमार का परिवार
नीतीश कुमार ने 22 फरवरी 1973 को मंजू कुमारी सिन्हा से शादी की थी। उनकी पत्नी सरकारी स्कूल में शिक्षिका रही थीं। दोनों का एक बेटा है, जिसका नाम निशांत कुमार है। नीतीश कुमार की पत्नी का 2007 में निधन हो गया था।
नीतीश कुमार का परिवार लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से काफी दूर रहा। उनके बेटे निशांत कुमार भी कई वर्षों तक राजनीति से दूर रहे। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और लंबे समय तक सार्वजनिक कार्यक्रमों में बहुत कम दिखाई दिए। 2026 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और JD(U) में शामिल हुए।
मई 2026 में निशांत कुमार बिहार की नई सरकार में मंत्री भी बने और उन्हें स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी दी गई। यह बदलाव इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि नीतीश कुमार लंबे समय से परिवारवाद की राजनीति से खुद को अलग रखने की बात करते रहे हैं। हालांकि निशांत की राजनीतिक भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग समय पर अलग-अलग बातें सामने आई हैं।
नीतीश कुमार की राजनीतिक पहचान
नीतीश कुमार की राजनीति को समझने के लिए उनके समाजवादी दौर और गठबंधन की राजनीति दोनों को देखना पड़ता है। वे जेपी आंदोलन से निकले नेताओं की पीढ़ी से आते हैं। शुरुआत में वे जनता दल की राजनीति का हिस्सा रहे और बाद में जॉर्ज फर्नांडिस के साथ समता पार्टी बनाई। फिर JD(U) के गठन के बाद वे पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए।
उनकी राजनीति का एक बड़ा हिस्सा बिहार में गठबंधन बदलने से भी जुड़ा रहा है। उन्होंने अलग-अलग समय में बीजेपी के साथ सरकार बनाई, फिर RJD के साथ गए और बाद में दोबारा NDA में लौटे। इन बदलावों को लेकर उनके राजनीतिक विरोधियों ने आलोचना की, जबकि उनके समर्थकों ने इसे परिस्थितियों के अनुसार राजनीतिक फैसला बताया। इन दोनों नजरियों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
नीतीश कुमार और बिहार का शासन
मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल में बिहार में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत व्यवस्था और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर काम हुआ। उनके शासन की पहचान प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव और सरकारी योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने की कोशिशों से भी बनी।
उनके कार्यकाल में शराबबंदी भी लागू की गई। अप्रैल 2016 में बिहार में शराब की बिक्री और सेवन पर व्यापक रोक लागू की गई थी। बाद के वर्षों में इस कानून को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की बातें सामने आती रही हैं। इसलिए शराबबंदी को लेकर किसी एक राजनीतिक दावे को पूरी तस्वीर मानने के बजाय कानून, उसके लागू होने और समय-समय पर सामने आए आंकड़ों को अलग-अलग देखना ज्यादा उचित है।
2026 में नीतीश कुमार की नई भूमिका
2026 में नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन में एक बड़ा बदलाव आया। उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन किया और 10 अप्रैल 2026 को संसद भवन में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। इसके बाद उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री पद से हटकर राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका संभाली। राज्यसभा में उन्होंने हिंदी में शपथ ली।
उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। बिहार सरकार की मौजूदा आधिकारिक वेबसाइट पर भी सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री और नीतीश कुमार को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में दर्ज किया गया है।
नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा, लेकिन JD(U) की राजनीति में उनकी भूमिका खत्म नहीं हुई। मार्च 2026 में वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में दोबारा निर्विरोध चुने गए और जून 2026 में पार्टी की राष्ट्रीय परिषद ने उनके पुनर्निर्वाचन को मंजूरी दी। सितंबर 2026 तक वे JD(U) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य के रूप में सक्रिय हैं।
नीतीश कुमार की कहानी को संक्षेप में समझें
- नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बख्तियारपुर, बिहार में हुआ।
- उन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
- वे 1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े।
- 1985 में पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य बने।
- 1989 में पहली बार लोकसभा पहुंचे।
- उन्होंने केंद्र में कृषि, रेल और सतह परिवहन जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
- मार्च 2000 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने।
- 2005 से बिहार की सत्ता में उनका सबसे लंबा राजनीतिक दौर शुरू हुआ।
- उन्होंने अलग-अलग समय पर बीजेपी और RJD दोनों के साथ सरकारें बनाई हैं।
- अप्रैल 2026 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली।
- सितंबर 2026 तक वे JD(U) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए हैं।
Latest Update
अक्टूबर 2026 तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नहीं हैं। वे राज्यसभा के सदस्य हैं और जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पार्टी की राजनीति में सक्रिय हैं। बिहार में उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं। नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी 2026 में सक्रिय राजनीति में आए और राज्य सरकार में मंत्री बने। इस तरह नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन में अब मुख्यमंत्री के पद से अलग एक नया दौर चल रहा है।
