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योगी से सवाल पूछने वाली महिला पत्रकार ने बताया क्या हुआ, अखिलेश यादव ने भी उठाए सवाल

लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस वार्ता के दौरान एक महिला पत्रकार के सवाल पूछने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। पत्रकार की पहचान दिव्या श्रीवास्तव के रूप में हुई है। प्रेस वार्ता के बाद का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह मुख्यमंत्री से सवाल का जवाब देने की बात कहती नजर आ रही हैं। इसके बाद पत्रकार ने अपने साथ हुए घटनाक्रम को लेकर कई बातें बताई हैं।

दिव्या श्रीवास्तव ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि प्रेस वार्ता के बाद उन्हें भाजपा कार्यालय में घेरकर सवाल किया गया और धमकाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पीछे LIU के लोगों के आने की बात उन्हें पता चली और बाद में उनकी नौकरी भी चली गई। ये सभी बातें पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इनके बारे में सरकार या पुलिस की तरफ से ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है कि उन्हें सवाल पूछने की वजह से नौकरी से हटाया गया।

मामला सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका ही नहीं दिया जाना है तो प्रेस वार्ता को प्रेस एकालाप कहा जाना चाहिए। भाजपा की ओर से इस पूरे मामले पर अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर सामने आई हैं, लेकिन पार्टी की तरफ से दिव्या श्रीवास्तव के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।

प्रेस वार्ता में क्या हुआ था?

यह मामला 11 सितंबर 2026 को लखनऊ में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में हुई प्रेस वार्ता से जुड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के मौके पर होने वाले सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने पहुंचे थे। उनके साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी भी मौजूद थे।

प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान के कार्यक्रमों की जानकारी दी। इसके बाद जब वह वहां से निकल रहे थे, तब एक महिला पत्रकार ने उनसे सवाल पूछने की कोशिश की। सामने आए वीडियो में महिला पत्रकार मुख्यमंत्री से रुककर सवाल का जवाब देने की बात कहती दिखाई देती हैं।

वीडियो को बाद में अखिलेश यादव ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। इसी वीडियो के आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री की प्रेस वार्ता को लेकर सवाल उठाए। समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में सवाल बहुत हैं, लेकिन सरकार के पास जवाब नहीं हैं। उन्होंने प्रेस वार्ता का नाम बदलकर प्रेस एकालाप करने की बात कही।

महिला पत्रकार ने अपने साथ क्या होने का दावा किया?

घटना के बाद पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने अपने अनुभव के बारे में बात की। उनके इंटरव्यू के अंश सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के बाद उन्हें भाजपा कार्यालय में घेर लिया गया था।

पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें घर पर बुलडोजर चलने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा कि LIU की ओर से भी उनके बारे में पूछताछ की जा रही थी। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि उन्हें अपने चैनल से भी निकाल दिया गया और वह इस पूरे घटनाक्रम के बाद डर महसूस कर रही हैं।

इन दावों की जानकारी कई सोशल मीडिया पोस्ट और स्थानीय रिपोर्टों में सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि पत्रकार को केवल मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की वजह से ही नौकरी से हटाया गया या सरकारी एजेंसियों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। अभी इस हिस्से को पत्रकार के आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

सवाल क्या था?

सामने आए वीडियो में दिव्या श्रीवास्तव मुख्यमंत्री से सवाल का जवाब देने की बात कहती दिखाई देती हैं। वीडियो में वह यह भी कहती हैं कि अगर प्रेस वार्ता के लिए पत्रकारों को बुलाया गया है तो सवालों के जवाब भी दिए जाने चाहिए।

वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वहां से आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। महिला पत्रकार लगातार सवाल पूछने की कोशिश करती हैं। इसी हिस्से को अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में इस्तेमाल किया और सरकार पर प्रेस से सवाल लेने से बचने का आरोप लगाया।

हालांकि, इस पूरे वीडियो से यह पता नहीं चलता कि प्रेस वार्ता के अंदर पत्रकार ने इससे पहले कौन-कौन से सवाल पूछे थे या वहां मौजूद अधिकारियों की तरफ से उन्हें क्या निर्देश दिए गए थे। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे अलग-अलग दावों को पूरी घटना का प्रमाण मानना ठीक नहीं होगा।

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

अखिलेश यादव ने 12 सितंबर को इस मामले पर सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रेस वार्ता का नाम बदलकर प्रेस एकालाप कर देना चाहिए, क्योंकि जब सिर्फ बयान देना हो और पत्रकारों को सवाल पूछने का अधिकार न हो तो वार्ता शब्द का कोई मतलब नहीं रह जाता।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अगर केवल बयान देना चाहती है तो प्रेस विज्ञप्ति भेजकर काम चला सकती है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में सवालों की भरमार है लेकिन सरकार के पास उनके जवाब नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के वहां से चले जाने को लेकर भी तंज किया।

अखिलेश यादव ने जो वीडियो साझा किया, उसमें महिला पत्रकार मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश करती दिखाई दे रही हैं। इस वीडियो के बाद ही सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से चर्चा में आया।

बीजेपी की तरफ से क्या कहा गया?

इस मामले में भाजपा की तरफ से सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ भाजपा समर्थक पोस्ट में पत्रकार के सवाल पूछने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि पत्रकार ने बिना पहले से तय सवाल के मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश की थी। हालांकि, यह किसी आधिकारिक भाजपा बयान के रूप में सामने नहीं आया है।

इसलिए भाजपा की आधिकारिक स्थिति बताते समय सावधानी जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में भाजपा के किसी बड़े आधिकारिक पदाधिकारी का ऐसा स्पष्ट बयान नहीं मिला है जिसमें दिव्या श्रीवास्तव के नौकरी जाने, LIU की पूछताछ या धमकी के आरोपों की पुष्टि की गई हो।

सोशल मीडिया पर समर्थकों और विरोधियों की ओर से कई तरह की बातें कही जा रही हैं। लेकिन किसी राजनीतिक दल के समर्थक की पोस्ट और पार्टी के आधिकारिक बयान में फर्क होता है। इस मामले में अभी तक दोनों को एक जैसा मानना सही नहीं होगा।

पत्रकार के नौकरी जाने का दावा कितना साफ है?

यह इस मामले का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा है। दिव्या श्रीवास्तव ने दावा किया है कि उन्हें उनके चैनल से निकाल दिया गया। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के बाद हालात ऐसे बने कि वह नौकरी से बाहर हो गईं।

लेकिन उपलब्ध जानकारी में चैनल की ओर से नौकरी खत्म करने का कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना कि उन्हें सीधे मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की वजह से नौकरी से निकाल दिया गया, अभी पुष्टि की हुई बात नहीं है। फिलहाल यह पत्रकार की ओर से कही गई बात है।

इसी तरह LIU की पूछताछ और धमकी से जुड़े दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में आगे पुलिस, प्रशासन या संबंधित संस्था की तरफ से कोई बयान आता है तो स्थिति ज्यादा साफ हो सकती है।

कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा

इस मामले पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने महिला पत्रकार के आरोपों को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधा। अजय राय ने कहा कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के बाद महिला पत्रकार के पीछे LIU लगाए जाने और उनका काम छीनने के आरोप गंभीर हैं।

अजय राय ने इसे पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सवाल पूछने वालों को डराने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया भी सरकार की आलोचना के रूप में सामने आई है।

यहां भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं। इनके आधार पर पुलिस या प्रशासन की कार्रवाई को साबित नहीं माना जा सकता।

मामला सोशल मीडिया पर क्यों बढ़ा?

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के बाद मामला बड़ा हो गया। वीडियो में महिला पत्रकार मुख्यमंत्री से सवाल का जवाब मांगती नजर आती हैं और मुख्यमंत्री वहां से आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। इसके बाद कई राजनीतिक नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने-अपने तरीके से इस घटना पर प्रतिक्रिया दी।

अखिलेश यादव की पोस्ट के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया। उन्होंने सीधे प्रेस वार्ता के तरीके पर सवाल उठाया। दूसरी तरफ कुछ भाजपा समर्थक सोशल मीडिया पोस्ट में पत्रकार के सवाल पूछने के तरीके की आलोचना करते दिखाई दिए।

इसी बीच पत्रकार के इंटरव्यू की बातें भी सामने आईं। इसमें उन्होंने अपने साथ कथित तौर पर हुई पूछताछ और धमकी की जानकारी दी। इससे मामला केवल प्रेस वार्ता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पत्रकार की सुरक्षा और नौकरी से जुड़े सवाल भी चर्चा में आ गए।

क्या मुख्यमंत्री ने पत्रकार के सवाल का जवाब दिया?

सामने आए वीडियो के आधार पर ऐसा दिखाई देता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रेस वार्ता खत्म होने के बाद वहां से निकल रहे थे और महिला पत्रकार ने उनसे सवाल पूछने की कोशिश की। वीडियो में महिला पत्रकार उनसे जवाब देने के लिए रुकने की अपील करती सुनाई देती हैं।

इस वीडियो में मुख्यमंत्री की ओर से उस समय कोई विस्तृत जवाब दिखाई नहीं देता। इसी वजह से अखिलेश यादव ने प्रेस वार्ता को लेकर सवाल उठाया।

हालांकि, वीडियो का एक हिस्सा पूरी घटना का पूरा संदर्भ नहीं बताता। प्रेस वार्ता में पहले क्या हुआ और पत्रकारों के लिए सवाल लेने की व्यवस्था क्या थी, इसकी पूरी जानकारी के लिए आयोजकों या संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक बयान जरूरी होगा।

मामले में अभी क्या-क्या साफ नहीं है?

इस घटना के कई हिस्से अभी आरोप और दावों के स्तर पर हैं। सबसे पहले यह साफ नहीं है कि दिव्या श्रीवास्तव को उनके संस्थान ने किस वजह से नौकरी से हटाया। पत्रकार ने इसे घटना से जोड़कर बताया है, लेकिन संस्थान की ओर से सार्वजनिक रूप से ऐसा कारण सामने नहीं आया है।

दूसरा सवाल LIU से जुड़ा है। पत्रकार ने पूछताछ किए जाने का दावा किया है। लेकिन उपलब्ध जानकारी में पुलिस या LIU की तरफ से इस बारे में कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान नहीं मिला है।

तीसरा सवाल कथित धमकी का है। पत्रकार ने भाजपा कार्यालय में घेरने और बुलडोजर की धमकी मिलने की बात कही है। इस दावे की भी अभी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन बातों को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि पत्रकार के आरोप के रूप में ही लिखना उचित है।

अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद क्या हुआ?

अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पत्रकारों को सवाल पूछने की अनुमति नहीं है तो प्रेस वार्ता करने का क्या मतलब है। उनके बयान के बाद कई विपक्षी नेताओं और पत्रकारों ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी।

वहीं, सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों की ओर से भी पत्रकार के खिलाफ टिप्पणियां सामने आईं। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि पत्रकार ने तय प्रक्रिया से अलग जाकर सवाल पूछा था। लेकिन इन दावों की पुष्टि किसी आधिकारिक दस्तावेज या भाजपा के औपचारिक बयान से नहीं हुई है।

यही वजह है कि फिलहाल इस मामले में वीडियो और संबंधित लोगों के सार्वजनिक बयानों को अलग-अलग देखना जरूरी है। एक तरफ वीडियो में सवाल पूछने की घटना दिखाई दे रही है, दूसरी तरफ पत्रकार ने उसके बाद अपने साथ हुए घटनाक्रम के बारे में गंभीर आरोप लगाए हैं।

मामला अब किस स्थिति में है?

12 सितंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री की प्रेस वार्ता के तरीके पर सवाल उठाया है। कांग्रेस नेता अजय राय ने पत्रकार के आरोपों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, भाजपा समर्थक सोशल मीडिया पोस्ट में पत्रकार के सवाल पूछने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।

दिव्या श्रीवास्तव की ओर से नौकरी जाने, LIU की पूछताछ और धमकी के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इस मामले में सबसे पक्की जानकारी यही है कि योगी आदित्यनाथ की प्रेस वार्ता के बाद महिला पत्रकार का वीडियो सामने आया और उसके बाद इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू हुईं।

आगे यदि पुलिस, सरकार, भाजपा या संबंधित मीडिया संस्थान की ओर से कोई आधिकारिक बयान आता है तो उसी के आधार पर इस मामले की स्थिति और साफ होगी।

Saket Kumar

Written by Saket Kumar

नमस्ते, मैं साकेत कुमार हूँ। पिछले 4+ सालों से मैं एक डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहा हूँ। ताज़ा ख़बरों, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और ख़ासकर टेक्नोलॉजी व मोबाइल अपडेट्स को आसान शब्दों में आप तक पहुँचाना मुझे बहुत पसंद है।"

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