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पुनौरा धाम में 5,100 दीपों से जगमगाया जानकी मंदिर, पीएम मोदी के जन्मदिन पर हुआ दीपोत्सव

सीतामढ़ी के पुनौरा धाम स्थित जानकी मंदिर में 17 सितंबर 2026 को दीपोत्सव का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में 5,100 दीप जलाए गए। शाम होते ही मंदिर परिसर रोशनी से भर गया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया।

बिहार में 17 सितंबर से शुरू हुए ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में दीपोत्सव का कार्यक्रम रखा गया था। बिहार सरकार के अनुसार, 17 सितंबर को सभी जिलों, अनुमंडलों, प्रखंडों, पंचायतों और बूथ स्तर तक ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के जरिए दीपोत्सव आयोजित करने की योजना थी।

पुनौरा धाम में भाजपा की ओर से आयोजित कार्यक्रम को ‘सेवा-संकल्प का दिन’ के तौर पर मनाया गया। मंदिर परिसर में दीप जलने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्साह दिखाई दिया। धार्मिक स्थल होने के कारण यहां पहले से ही आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन खास रहा।

5,100 दीपों से रोशन हुआ मंदिर परिसर

दीपोत्सव के दौरान जानकी मंदिर परिसर में कुल 5,100 दीप जलाए गए। एक साथ बड़ी संख्या में दीप जलने से मंदिर का परिसर रोशनी से जगमगा उठा। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने दीप जलाए और धार्मिक वातावरण में आयोजन में भाग लिया।

दीपोत्सव के लिए मंदिर परिसर में दीपों की व्यवस्था की गई थी। शाम के समय दीप जलाए जाने के बाद परिसर का दृश्य अलग नजर आया। स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालुओं ने भी इसमें भागीदारी की। आयोजन का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत जनभागीदारी को बढ़ाना था।

बिहार सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, ‘सेवा संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जाना है। इस दौरान अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इनमें ‘आशीर्वाद का दीया’ भी शामिल है, जिसके तहत 17 सितंबर को दीपोत्सव रखा गया था।

पुनौरा धाम क्यों है खास?

पुनौरा धाम क्यों है खास
पुनौरा धाम क्यों है खास

पुनौरा धाम सीतामढ़ी जिले में स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। बिहार पर्यटन विभाग के अनुसार, इस स्थान को माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है। यहां जानकी मंदिर स्थित है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, राजा जनक को यहीं भूमि जोतते समय माता सीता मिली थीं। इसी मान्यता के कारण पुनौरा धाम का संबंध माता जानकी के जन्म से जोड़ा जाता है। मंदिर और आसपास के धार्मिक स्थलों को सीतामढ़ी की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है।

बिहार पर्यटन विभाग ने पुनौरा धाम को रामायण सर्किट से भी जोड़ा है। विभाग की वेबसाइट पर इसे रामायण से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल बताया गया है। सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुनौरा धाम के अलावा पंथ पाकर, जनक स्थान और जानकी कुंड जैसे स्थान भी आसपास के धार्मिक आकर्षणों में शामिल हैं।

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जानकी मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही

पुनौरा धाम के जानकी मंदिर में धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। बिहार पर्यटन विभाग के अनुसार, रामनवमी, सीता नवमी और दूसरे धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में सीता माता की मूर्ति, पूजा स्थल और हवन मंडप भी मौजूद हैं।

धाम की धार्मिक पहचान सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं है। यहां सीता से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं का भी संबंध है। इसी वजह से सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा में पुनौरा धाम को खास स्थान मिलता है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत हुआ कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर बिहार में 17 सितंबर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से 12 सितंबर को जारी जानकारी में बताया गया था कि यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसके साथ ही बिहार में 17 सितंबर से 31 मार्च 2027 तक ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान’ चलाने की बात कही गई थी।

अभियान के तहत कई तरह के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इनमें दीपोत्सव के अलावा स्कूलों में चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं, सार्वजनिक स्थानों पर संगीत और नुक्कड़ नाटक जैसे कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार, इन कार्यक्रमों के जरिए जनभागीदारी बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

17 सितंबर को आयोजित दीपोत्सव को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से जोड़ा गया था। बिहार के अलग-अलग जिलों में इस दौरान दीप जलाए गए। सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में भी इसी क्रम में जानकी मंदिर परिसर में दीपोत्सव आयोजित किया गया।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

पुनौरा धाम में दीपोत्सव के दौरान स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिली। मंदिर परिसर में दीप जलाने के बाद लोगों ने आयोजन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। धार्मिक स्थल पर दीपों की रोशनी के बीच कार्यक्रम का माहौल भक्तिमय रहा।

स्थानीय स्तर पर इस तरह के आयोजन से मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनने का अवसर मिला। दीपोत्सव किसी एक जगह तक सीमित नहीं था, बल्कि बिहार में अभियान के तहत अलग-अलग स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।

सीतामढ़ी में पुनौरा धाम की धार्मिक पहचान को देखते हुए यहां आयोजित दीपोत्सव का केंद्र जानकी मंदिर रहा। मंदिर परिसर में जलाए गए 5,100 दीपों ने कार्यक्रम को दृश्य रूप से भी खास बना दिया।

सीतामढ़ी के धार्मिक पर्यटन में पुनौरा धाम की जगह

सीतामढ़ी का नाम ही माता सीता से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के कारण जाना जाता है। बिहार पर्यटन विभाग के अनुसार, जिले में कई ऐसे स्थल हैं जिनका संबंध रामायण की कथाओं और माता सीता से जुड़ी मान्यताओं से है। पुनौरा धाम इनमें प्रमुख स्थानों में शामिल है।

पुनौरा धाम सीतामढ़ी शहर से करीब 5 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। बिहार पर्यटन विभाग की जानकारी के अनुसार, यहां सीता कुंड और जानकी मंदिर जैसे धार्मिक स्थल हैं। स्थानीय परिवहन के लिए सीतामढ़ी से ऑटो-रिक्शा और बस की सुविधा उपलब्ध बताई गई है।

रामायण सर्किट की जानकारी में भी पुनौरा धाम को शामिल किया गया है। बिहार पर्यटन विभाग के अनुसार, यहां आने वाले लोगों के लिए सामान्य दर्शन का समय सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बताया गया है और प्रवेश शुल्क नहीं है।

धाम के आसपास पंथ पाकर और दूसरे धार्मिक स्थल भी हैं। इससे सीतामढ़ी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थानों को देखने का अवसर मिलता है। बिहार पर्यटन विभाग ने पुनौरा धाम को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े स्थल के रूप में दर्ज किया है।

दीपोत्सव का आयोजन क्यों किया गया?

17 सितंबर को आयोजित दीपोत्सव ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का हिस्सा था। राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी में बताया गया था कि इसका आयोजन बिहार के सभी जिलों से लेकर पंचायत और बूथ स्तर तक किया जाना था। कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही गई थी।

पुनौरा धाम में भाजपा की ओर से आयोजित कार्यक्रम को इसी अभियान के संदर्भ में ‘सेवा-संकल्प का दिन’ के रूप में मनाया गया। मंदिर परिसर में 5,100 दीप जलाने के साथ कार्यक्रम में स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

इस आयोजन में धार्मिक स्थल और सार्वजनिक कार्यक्रम दोनों का स्वरूप दिखाई दिया। एक ओर जानकी मंदिर में दीप जलाए गए, वहीं दूसरी ओर इसे सेवा संकल्प अभियान की गतिविधि के तौर पर आयोजित किया गया।

पुनौरा धाम से जुड़ी धार्मिक मान्यता

पुनौरा धाम से जुड़ी धार्मिक मान्यता
पुनौरा धाम से जुड़ी धार्मिक मान्यता

पुनौरा धाम की पहचान मुख्य रूप से माता सीता से जुड़ी मान्यता के कारण है। बिहार पर्यटन विभाग के अनुसार, धार्मिक मान्यता में इसे माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है। यहां स्थित जानकी मंदिर इसी आस्था का प्रमुख केंद्र है।

मान्यता के अनुसार राजा जनक खेत में हल चला रहे थे और उसी दौरान उन्हें सीता जी मिली थीं। इसी कथा से सीतामढ़ी और पुनौरा धाम का संबंध जोड़ा जाता है। यह धार्मिक परंपरा लंबे समय से इस क्षेत्र की पहचान का हिस्सा रही है।

मंदिर परिसर में अलग-अलग धार्मिक गतिविधियां होती रहती हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है। बिहार पर्यटन विभाग भी पुनौरा धाम को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख स्थलों में शामिल करता है।

पुनौरा धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जानकारी

बिहार पर्यटन विभाग की वेबसाइट के अनुसार, पुनौरा धाम सीतामढ़ी, बिहार में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए सीतामढ़ी से स्थानीय बस और ऑटो-रिक्शा का इस्तेमाल किया जा सकता है। विभाग ने मंदिर परिसर में मोबाइल और कैमरा जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अनुमति होने की जानकारी भी दी है।

धार्मिक स्थल होने के कारण यहां आने वाले लोगों से स्थानीय परंपराओं और पूजा की व्यवस्था का सम्मान करने की अपेक्षा की जाती है। बिहार पर्यटन विभाग ने मंदिर में प्रवेश से पहले जूते उतारने और सम्मानपूर्वक पूजा करने की सलाह दी है।

रामायण सर्किट की जानकारी में पुनौरा धाम के साथ पंथ पाकर और हलेश्वर स्थान जैसे दूसरे धार्मिक स्थलों को भी शामिल किया गया है। इससे श्रद्धालु सीतामढ़ी की धार्मिक यात्रा के दौरान कई स्थानों पर जा सकते हैं।

पुनौरा धाम में विकास कार्य भी जारी

पुनौरा धाम पिछले कुछ समय से धार्मिक पर्यटन और विकास योजनाओं के कारण भी चर्चा में रहा है। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुनौरा धाम दौरे के दौरान मंदिर परिसर से जुड़ी विकास योजनाओं की जानकारी सामने आई थी। उस दौरान राम दरबार की स्थापना और धाम के विकास से जुड़े कार्यों पर भी चर्चा हुई थी।

जिले में प्रशासनिक स्तर पर भी पुनौरा धाम की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों की निगरानी की जा रही है। अगस्त 2026 में सीतामढ़ी के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया ने पुनौरा धाम पहुंचकर पूजा-अर्चना की थी और वहां चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया था।

इससे साफ है कि पुनौरा धाम धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ सीतामढ़ी के पर्यटन और स्थानीय विकास से भी जुड़ा हुआ है। हालांकि किसी भी विकास परियोजना की अंतिम समयसीमा या काम पूरा होने की स्थिति अलग-अलग योजना के अनुसार बदल सकती है, इसलिए ऐसी जानकारी के लिए आधिकारिक अपडेट देखना जरूरी है।

कार्यक्रम से जुड़ी मुख्य बातें

  • स्थान: पुनौरा धाम, सीतामढ़ी, बिहार
  • मुख्य स्थल: जानकी मंदिर परिसर
  • आयोजन: दीपोत्सव
  • दीपों की संख्या: 5,100
  • अवसर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन
  • अभियान: सेवा संकल्प अभियान
  • कार्यक्रम: ‘आशीर्वाद का दीया’
  • आयोजक: भाजपा की ओर से स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम
  • तारीख: 17 सितंबर 2026

Latest Update

17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सीतामढ़ी के पुनौरा धाम स्थित जानकी मंदिर में 5,100 दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया गया। यह कार्यक्रम बिहार में शुरू किए गए ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित दीपोत्सव से जुड़ा था। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। पुनौरा धाम को माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है और बिहार पर्यटन विभाग इसे रामायण सर्किट के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल करता है।

Sunil Singh

Written by Sunil Singh

Sunil Khusha बिहार से जुड़े समाचार, सरकारी योजनाओं, शिक्षा और रोजगार से संबंधित जानकारी पर कंटेंट लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक आसान भाषा में सटीक और उपयोगी खबरें पहुंचाना है।

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