बांग्लादेश सरकार भारत के साथ पिछली सरकार के समय हुए 101 समझौतों और समझौता ज्ञापनों (MoUs) की समीक्षा कर रही है। बांग्लादेश की संसद के मुख्य सचेतक नूरुल इस्लाम मोनी ने 11 सितंबर 2026 को संसद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी 101 समझौतों को देखा जा रहा है और समीक्षा का नतीजा जल्द सामने आएगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के दौरान भारत के साथ हुए कई समझौतों को लेकर राजनीतिक चर्चा चल रही है। मौजूदा सरकार का कहना है कि वह भारत के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखना चाहती है, लेकिन समझौतों में बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा।
फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि बांग्लादेश ने भारत के साथ हुए सभी 101 समझौतों को रद्द करने का फैसला कर लिया है। सरकार ने अभी किसी खास समझौते को रद्द करने की घोषणा नहीं की है। इस समय इन समझौतों की समीक्षा चल रही है और आगे जरूरत के हिसाब से बदलाव, जारी रखने या रद्द करने का फैसला किया जा सकता है।
क्या कहा बांग्लादेश के मुख्य सचेतक ने?
नूरुल इस्लाम मोनी ने 13वीं संसद के तीसरे सत्र के बाद संसद मीडिया सेंटर में पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया। उनसे भारत के साथ हुए समझौतों और चटगांव तथा मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल से जुड़े प्रबंधों को लेकर सवाल किया गया था। इसी दौरान उन्होंने बताया कि सरकार भारत के साथ हुए सभी 101 MoUs और समझौतों की समीक्षा कर रही है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि बांग्लादेश दूसरे देशों के साथ दोस्ताना संबंध रखना चाहता है। लेकिन सरकार के लिए देश का राष्ट्रीय हित प्राथमिकता रहेगा। यानी समीक्षा का मकसद केवल भारत के साथ संबंधों को बदलना नहीं, बल्कि यह देखना है कि पुराने समझौतों से बांग्लादेश को क्या लाभ या नुकसान हो रहा है।
मोनी ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच दोस्ती बनी रहेगी, लेकिन इस रिश्ते में बांग्लादेश के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। यही बात उन्होंने पुराने समझौतों की समीक्षा के संदर्भ में भी कही।
101 समझौतों को लेकर अभी क्या स्थिति है?
अभी सबसे अहम बात यह है कि 101 समझौते समीक्षा के दायरे में हैं। सरकार ने अभी यह सूची जारी नहीं की है कि इनमें से कितने समझौते आगे भी लागू रहेंगे और कितने में बदलाव किया जाएगा। इसी तरह किसी खास समझौते को रद्द करने का अंतिम फैसला भी सामने नहीं आया है।
| मुद्दा | मौजूदा स्थिति |
|---|---|
| भारत के साथ समझौते | 101 MoUs और agreements की समीक्षा जारी |
| समझौतों का समय | पिछली Awami League सरकार के कार्यकाल के दौरान |
| समीक्षा का आधार | बांग्लादेश का राष्ट्रीय हित |
| क्या सभी समझौते रद्द हुए? | नहीं, ऐसी कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है |
| आगे क्या होगा? | समीक्षा के बाद सरकार फैसला लेगी |
इसलिए सोशल मीडिया या कुछ खबरों में अगर यह कहा जा रहा है कि बांग्लादेश ने भारत के साथ हुए 101 समझौते रद्द करने का फैसला कर लिया है, तो उसे अभी अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सरकार ने केवल समीक्षा की पुष्टि की है।
चटगांव पोर्ट का मामला चर्चा में क्यों है?
समीक्षा की चर्चा में चटगांव पोर्ट का मामला खास तौर पर सामने आया है। नूरुल इस्लाम मोनी ने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान ऐसे प्रबंध किए गए थे जिनमें किसी मित्र देश का जहाज और बांग्लादेश का जहाज एक साथ सामान उतारने के लिए पहुंचने पर विदेशी जहाज को प्राथमिकता मिलने की व्यवस्था हो सकती थी।
मुख्य सचेतक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ऐसे मामलों को देख रही है। हालांकि, उनके बयान में सभी 101 समझौतों में इसी तरह की व्यवस्था होने की बात नहीं कही गई थी। यह केवल समीक्षा के दौरान उठाया गया एक उदाहरण था।
चटगांव बांग्लादेश का प्रमुख समुद्री बंदरगाह है और देश के व्यापार में इसकी बड़ी भूमिका है। इसलिए बंदरगाह से जुड़े किसी भी समझौते का असर व्यापार और सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है। सरकार इसी तरह के पुराने प्रबंधों की जांच कर रही है कि वे मौजूदा राष्ट्रीय हित के हिसाब से ठीक हैं या नहीं।
मोंगला पोर्ट का भी जिक्र
पत्रकारों ने चटगांव के साथ मोंगला बंदरगाह से जुड़े समझौतों के बारे में भी सवाल किया। मुख्य सचेतक ने कहा कि भारत के साथ हुए सभी 101 समझौते समीक्षा के तहत हैं। उन्होंने किसी एक समझौते को रद्द करने की तारीख या अंतिम फैसला नहीं बताया।
इसका मतलब यह है कि फिलहाल बंदरगाहों से जुड़े समझौतों को लेकर सरकार की तरफ से समीक्षा चल रही है। जब तक सरकार की ओर से लिखित या आधिकारिक फैसला सामने नहीं आता, तब तक यह कहना सही नहीं होगा कि चटगांव या मोंगला पोर्ट से जुड़े सभी पुराने समझौते खत्म कर दिए गए हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत और बांग्लादेश के संबंध कई क्षेत्रों में फैले हुए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, बिजली, परिवहन, सीमा प्रबंधन, पानी, बंदरगाह और क्षेत्रीय संपर्क जैसे मुद्दों पर लंबे समय से बातचीत और सहयोग होता रहा है। ऐसे में 101 समझौतों की समीक्षा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
बांग्लादेश सरकार ने अभी तक यह नहीं कहा है कि वह भारत के साथ संबंध खत्म करना चाहती है। इसके उलट मुख्य सचेतक ने साफ कहा है कि पड़ोसी देशों के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखना सरकार की नीति का हिस्सा है। साथ ही सरकार राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की बात कर रही है।
इसलिए इस पूरे मामले को भारत-बांग्लादेश संबंध खत्म होने के तौर पर देखना सही नहीं होगा। फिलहाल मुद्दा पुराने समझौतों की समीक्षा और उनकी शर्तों की जांच का है।
पूर्व शेख हसीना सरकार के समझौते जांच के दायरे में क्यों?
101 समझौते उस समय किए गए थे जब शेख हसीना के नेतृत्व वाली Awami League सरकार सत्ता में थी। मौजूदा सरकार इन समझौतों को एक-एक करके देख रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि इनमें ऐसी कोई शर्त तो नहीं है जिससे बांग्लादेश के आर्थिक, व्यापारिक या रणनीतिक हित प्रभावित होते हों।
बांग्लादेश के मुख्य सचेतक ने कहा है कि सरकार को जो समझौते देश के हित के खिलाफ लगेंगे, उनके बारे में जरूरी कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि समीक्षा के बाद कितने समझौतों में बदलाव होगा।
सरकार किन बातों को देख रही है?
- समझौते से बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित पर क्या असर पड़ता है।
- बंदरगाह और व्यापार से जुड़े प्रबंध बांग्लादेश के लिए कितने उपयोगी हैं।
- समझौते की मौजूदा शर्तें आज भी उचित हैं या नहीं।
- किसी व्यवस्था से बांग्लादेशी कंपनियों या नागरिकों को नुकसान तो नहीं हो रहा।
- पुराने समझौतों में बदलाव की जरूरत है या नहीं।
हालांकि सरकार ने इन सभी बिंदुओं की कोई विस्तृत आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। ये वे क्षेत्र हैं जिनका उल्लेख सार्वजनिक बयानों और रिपोर्टों में समीक्षा के संदर्भ में किया गया है।
क्या 101 समझौते रद्द किए जाएंगे?
इस सवाल का अभी कोई अंतिम जवाब नहीं है। मुख्य सचेतक ने कहा है कि सरकार समीक्षा कर रही है और परिणाम जल्द बताया जाएगा। उन्होंने यह नहीं कहा कि सभी 101 समझौते रद्द कर दिए जाएंगे।
समीक्षा के बाद तीन तरह की स्थिति बन सकती है। कुछ समझौते उसी तरह जारी रह सकते हैं, कुछ में बदलाव किया जा सकता है और कुछ को खत्म करने का फैसला लिया जा सकता है। लेकिन इनमें से किस विकल्प को किस समझौते पर लागू किया जाएगा, इसकी जानकारी सरकार ने अभी सार्वजनिक नहीं की है।
इसी वजह से इस समय सबसे सही जानकारी यही है कि 101 समझौते समीक्षा के अधीन हैं। रद्द करने या संशोधन की अंतिम सूची आने के बाद ही यह साफ होगा कि किन समझौतों पर सरकार ने क्या फैसला लिया।
BRICS को लेकर भी चर्चा
101 समझौतों की समीक्षा की खबर ऐसे समय आई है जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के BRICS Summit से जुड़े निमंत्रण को लेकर भी चर्चा हुई। कुछ बांग्लादेशी रिपोर्टों में इस मुद्दे का जिक्र मुख्य सचेतक के बयान के साथ किया गया है।
नूरुल इस्लाम मोनी ने भारत में होने वाले BRICS Summit से जुड़े निमंत्रण पर भी नाराजगी जताई थी। हालांकि, 101 समझौतों की समीक्षा के आधिकारिक बयान को केवल इसी मुद्दे से जोड़ना सही नहीं होगा। सरकार ने समीक्षा को व्यापक तौर पर पुराने भारत-बांग्लादेश समझौतों और राष्ट्रीय हित से जोड़कर बताया है।
समीक्षा से जुड़े प्रमुख तथ्य
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| कुल समझौते | 101 MoUs और agreements |
| दूसरा देश | भारत |
| पुराने समझौते किस सरकार के समय हुए | शेख हसीना के नेतृत्व वाली Awami League सरकार के दौरान |
| समीक्षा कौन कर रहा है | बांग्लादेश सरकार |
| बयान देने वाले नेता | संसद के मुख्य सचेतक नूरुल इस्लाम मोनी |
| समीक्षा का मुख्य आधार | बांग्लादेश का राष्ट्रीय हित |
| अंतिम फैसला | अभी घोषित नहीं |
बांग्लादेश सरकार ने भारत को लेकर क्या रुख बताया?
सरकार के बयान में भारत को दुश्मन देश नहीं बताया गया है। मुख्य सचेतक ने पड़ोसी देशों के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखने की बात कही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दोस्ती का मतलब राष्ट्रीय हित से समझौता करना नहीं है।
यह रुख इस पूरे मामले को समझने के लिए अहम है। 101 समझौतों की समीक्षा का मतलब यह नहीं है कि बांग्लादेश भारत के साथ सभी पुराने संबंध खत्म करने जा रहा है। सरकार उन समझौतों को जांच रही है जिन्हें पिछली सरकार के समय मंजूरी मिली थी और यह देख रही है कि वे मौजूदा परिस्थितियों में बांग्लादेश के लिए सही हैं या नहीं।
आगे क्या हो सकता है?
अब अगला कदम समीक्षा के नतीजे का इंतजार करना है। मुख्य सचेतक ने कहा है कि इसका परिणाम जल्द सामने आएगा। इसके बाद सरकार यह बता सकती है कि किन समझौतों को जारी रखा जाएगा और किन मामलों में बदलाव या दूसरी कार्रवाई की जरूरत है।
जब तक आधिकारिक फैसला नहीं आता, तब तक किसी भी समझौते के रद्द होने की खबर को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए। खास तौर पर 101 समझौतों के बारे में यह दावा कि सभी समझौते रद्द किए जा रहे हैं, अभी उपलब्ध आधिकारिक बयान से साबित नहीं होता।
Latest Update
13 सितंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार बांग्लादेश सरकार भारत के साथ पिछली Awami League सरकार के दौरान हुए 101 MoUs और agreements की समीक्षा कर रही है। संसद के मुख्य सचेतक नूरुल इस्लाम मोनी ने 11 सितंबर को कहा था कि समीक्षा का परिणाम जल्द सामने आएगा। चटगांव और मोंगला बंदरगाहों से जुड़े प्रबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लेकिन अभी तक किसी एक या सभी 101 समझौतों को रद्द करने की अंतिम घोषणा नहीं हुई है। बांग्लादेश सरकार ने भारत के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखने की बात कही है, साथ ही राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने का रुख स्पष्ट किया है। आगे का फैसला समीक्षा पूरी होने के बाद ही साफ होगा।
