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Rajasthan Local Body Election Results Live Updates: वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में BJP को बड़ा झटका, कांग्रेस ने 29 वार्ड जीते

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव 2026 के नतीजों की तस्वीर अब साफ होने लगी है। 14 सितंबर को हो रही मतगणना के बीच झालावाड़ नगर परिषद का परिणाम खास चर्चा में है। वसुंधरा राजे के मजबूत राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ में कांग्रेस ने 45 में से 29 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनना तय माना जा रहा है।

झालावाड़ का यह नतीजा इसलिए भी अहम है क्योंकि जिले की राजनीति लंबे समय से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके परिवार के प्रभाव से जुड़ी रही है। ऐसे क्षेत्र में नगर परिषद के स्तर पर कांग्रेस का 29 वार्ड तक पहुंचना भाजपा के लिए स्थानीय राजनीति में बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि पूरे राजस्थान के निकाय चुनाव की तस्वीर झालावाड़ से अलग है और राज्य के कई दूसरे शहरी निकायों में भाजपा बढ़त बनाए हुए है।

राजस्थान में इस बार 309 शहरी निकायों के लिए चुनाव कराया गया। इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाएं शामिल हैं। पार्षद पदों के लिए मतदान 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में हुआ था। मतगणना 14 सितंबर को सुबह 8 बजे से शुरू हुई। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी 309 नगरीय निकायों में एक साथ मतगणना शुरू करने के निर्देश दिए थे।

झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस को साफ बहुमत

झालावाड़ नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने 29 वार्ड जीत लिए हैं। 45 सदस्यीय परिषद में बहुमत के लिए 23 सीटों की जरूरत होती है। कांग्रेस ने इससे छह सीट ज्यादा जीतकर अकेले ही बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इसलिए बोर्ड बनाने के लिए पार्टी को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत नहीं होगी। turn1news1

इस परिणाम का सबसे सीधा असर नगर परिषद की सत्ता पर पड़ेगा। कांग्रेस के पास अब सभापति और परिषद में फैसले लेने के लिए पर्याप्त संख्या होगी। नगर परिषद के स्तर पर बोर्ड बनने की औपचारिक प्रक्रिया आगे पूरी की जाएगी। निकाय प्रमुखों के चुनाव के लिए राज्य में 21 सितंबर की तारीख तय की गई है। इसके बाद 22 सितंबर को नगर निकायों की सामान्य बैठक और उपसभापति सहित अन्य पदों से जुड़ी प्रक्रिया होगी।

झालावाड़ में कांग्रेस की यह जीत केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है। यह उस इलाके में पार्टी की स्थानीय संगठनात्मक स्थिति के लिए भी अहम है, जहां भाजपा का प्रभाव लंबे समय से मजबूत माना जाता रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में भी झालरापाटन सीट से वसुंधरा राजे ने बड़ी जीत दर्ज की थी। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार उन्होंने 1,14,384 वोट हासिल किए थे और कांग्रेस उम्मीदवार को पीछे छोड़ा था।

वसुंधरा राजे के गढ़ में BJP को झटका क्यों माना जा रहा है?

झालावाड़ को राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे का प्रमुख राजनीतिक आधार माना जाता है। झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र से राजे लंबे समय से चुनाव लड़ती रही हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार पर 34,980 वोटों की बढ़त से जीत दर्ज की थी। इस क्षेत्र में भाजपा की पकड़ का इतिहास काफी पुराना है।

इसी वजह से नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस का 29 वार्ड जीतना स्थानीय राजनीति के लिहाज से खास परिणाम है। नगर निकाय चुनाव सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव जैसा नहीं होता। इसमें स्थानीय उम्मीदवार, वार्ड स्तर के समीकरण, मोहल्ले के मुद्दे और व्यक्तिगत संपर्क काफी असर डालते हैं। इसलिए इस नतीजे को सीधे विधानसभा चुनाव का परिणाम मानना सही नहीं होगा। फिर भी किसी मजबूत राजनीतिक क्षेत्र में एक पार्टी का इतने बड़े अंतर से नगर परिषद पर कब्जा करना उसके लिए निश्चित तौर पर अहम उपलब्धि है।

झालावाड़ नगर परिषद में इस बार कांग्रेस ने 45 में से 43 वार्डों में उम्मीदवार उतारे थे। उपलब्ध उम्मीदवार रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी ने वार्ड 5 और वार्ड 31 में उम्मीदवार नहीं उतारा था। भाजपा ने 44 वार्डों में उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जबकि आम आदमी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवार भी कई वार्डों में चुनाव लड़ रहे थे।

झालावाड़ में 45 वार्डों का चुनाव

नगर परिषद के 45 वार्डों में अलग-अलग स्थानीय मुद्दों पर मुकाबला हुआ। चुनाव से पहले वार्डों का आरक्षण भी तय किया गया था। इनमें सामान्य, सामान्य महिला, OBC, OBC महिला, SC, SC महिला और ST जैसी श्रेणियों के वार्ड शामिल थे। इससे कई पुराने स्थानीय नेताओं को इस बार अलग वार्डों से चुनाव लड़ना पड़ा या पार्टी ने नए चेहरों को मौका दिया।

उम्मीदवारों के रिकॉर्ड के अनुसार कांग्रेस ने कई वार्डों में नए और स्थानीय चेहरों को मैदान में उतारा था। वार्ड 1 में अरफिया जहां, वार्ड 2 में टीना, वार्ड 3 में रामसिंह, वार्ड 4 में महेश सैन, वार्ड 7 में महेंद्र सिंह और वार्ड 8 में उमा बाई सहित कई उम्मीदवार कांग्रेस की ओर से मैदान में थे।

वार्ड 15 से राजीव कुमार, वार्ड 16 से रिचा जैन, वार्ड 17 से हसन राजा, वार्ड 18 से अकबर खान और वार्ड 19 से ममता जैसे उम्मीदवार भी कांग्रेस की सूची में शामिल थे। वार्ड 23 से परमानंद, वार्ड 24 से प्रियंका मीणा और वार्ड 25 से प्रिया ने चुनाव लड़ा। यह सूची दिखाती है कि पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार उतारे थे।

वार्ड 29 में कांग्रेस की ओर से अक्षय प्रताप उम्मीदवार थे। इस वार्ड में कुल 1,104 मतदाता दर्ज थे और एक मतदान केंद्र बनाया गया था। यह सीट सामान्य श्रेणी में थी।

राजस्थान में BJP की स्थिति कैसी है?

झालावाड़ के परिणाम को पूरे राजस्थान के निकाय चुनाव का संकेत मानना सही नहीं होगा। राज्य के दूसरे हिस्सों से आ रहे परिणामों में भाजपा कई जगह मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। 14 सितंबर को दोपहर से पहले सामने आए राज्यस्तरीय आंकड़ों में भाजपा कई सीटों पर कांग्रेस से आगे चल रही थी। एक रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती चरण में भाजपा ने 708 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 613 सीटें थीं और निर्दलीयों ने 386 सीटें जीती थीं। ये आंकड़े उस समय तक घोषित परिणामों पर आधारित थे और मतगणना आगे बढ़ने के साथ बदल सकते थे।

झालावाड़ में कांग्रेस की बढ़त इसलिए अलग दिखाई दे रही है क्योंकि यहां पार्टी ने केवल मामूली बढ़त नहीं बनाई, बल्कि 45 में से 29 वार्ड अपने नाम कर लिए। इसके उलट जयपुर जैसे बड़े शहरी क्षेत्र में शुरुआती परिणामों में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा। जयपुर नगर निगम के शुरुआती घोषित वार्डों में भाजपा ने कांग्रेस से ज्यादा सीटें जीती थीं।

उदयपुर से भी भाजपा के पक्ष में शुरुआती परिणाम सामने आए। वहां घोषित 15 वार्डों में भाजपा ने 10 और कांग्रेस ने 5 वार्ड जीते थे। आबूरोड में भाजपा और कांग्रेस के बीच बराबरी का मुकाबला देखने को मिला, जहां दोनों दलों ने 11-11 वार्ड जीते। इससे साफ है कि राजस्थान के अलग-अलग शहरों में स्थानीय चुनाव का समीकरण एक जैसा नहीं रहा।

कब और कैसे हुआ राजस्थान निकाय चुनाव?

राजस्थान के 309 शहरी निकायों में 10,245 पार्षद पदों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया था। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल थीं। करीब 1.44 करोड़ मतदाता इस चुनाव में मतदान के लिए पात्र थे। मतदान दो चरणों में 9 सितंबर और 11 सितंबर को हुआ।

पहले चरण में 9 सितंबर को 162 शहरी निकायों में मतदान हुआ। इसके बाद 11 सितंबर को दूसरे चरण में 147 शहरी निकायों में वोट डाले गए। दूसरे चरण में कुल मतदान 70.68 प्रतिशत रहा। दोनों चरणों को मिलाकर राज्य में कुल मतदान 72.95 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो पिछले निकाय चुनाव के 70.31 प्रतिशत मतदान से ज्यादा था।

दूसरे चरण में 87,63,595 मतदाता मतदान के लिए पात्र थे। इनमें से 61,93,865 लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस चरण में सबसे ज्यादा मतदान बालोतरा के धोरीमन्ना में 91.59 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम मतदान सिरोही में 62.03 प्रतिशत रहा।

झालावाड़ में मतदान से पहले क्या था माहौल?

झालावाड़ नगर परिषद में कुल 45 वार्डों के लिए चुनाव हुआ। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार यहां 9 और 11 सितंबर के चरणों में मतदान कराया गया। मतगणना 14 सितंबर को शुरू हुई। परिणाम सामने आने के बाद अब वार्डवार जीत की तस्वीर भी स्पष्ट होती जा रही है।

चुनाव से पहले नामांकन प्रक्रिया 27 अगस्त से शुरू हुई थी। उम्मीदवारों को 31 अगस्त तक नामांकन दाखिल करने का मौका मिला था। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 3 सितंबर थी और 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए।

झालावाड़ नगर परिषद के 45 वार्डों में कांग्रेस के 43 उम्मीदवार, भाजपा के 44 उम्मीदवार, आम आदमी पार्टी के 8 उम्मीदवार और 19 निर्दलीय उम्मीदवारों का रिकॉर्ड उपलब्ध था। अलग-अलग वार्डों में उम्मीदवारों की संख्या अलग रही। इससे कई जगह मुकाबला सीधा BJP बनाम Congress नहीं रहा और निर्दलीय तथा अन्य दल भी चुनावी समीकरण में शामिल रहे।

77 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने गए थे

राजस्थान के निकाय चुनाव में मतदान से पहले ही 77 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे। इनमें भाजपा के 44, कांग्रेस के 16 और निर्दलीय उम्मीदवारों के 17 नाम शामिल थे। निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में 37 महिलाएं भी थीं।

इसका मतलब यह है कि राज्य के सभी 10,245 पार्षद पदों पर मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। कुछ वार्डों में मुकाबला नहीं होने के कारण उम्मीदवारों को बिना मतदान के ही विजेता घोषित किया गया। बाकी सीटों के लिए EVM के जरिए वोट डाले गए और अब उनकी गिनती की जा रही है।

झालावाड़ का परिणाम कांग्रेस के लिए कितना बड़ा?

कांग्रेस के लिए 29 वार्डों में जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पार्टी को नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत मिला है। 45 सदस्यीय परिषद में 23 सीटें बहुमत के लिए पर्याप्त थीं, जबकि कांग्रेस 29 तक पहुंच गई। यानी पार्टी के पास बहुमत से छह सीट ज्यादा हैं।

इस स्थिति में कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए किसी दूसरे दल या निर्दलीय पार्षद पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। स्थानीय निकाय में बहुमत का फायदा सीधे तौर पर बोर्ड के गठन और परिषद में निर्णय लेने की प्रक्रिया में दिखाई देता है। हालांकि सभापति का चुनाव अलग प्रक्रिया के तहत होगा और उसके लिए राज्य चुनाव कार्यक्रम के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

दूसरी तरफ भाजपा के लिए यह परिणाम स्थानीय संगठन के प्रदर्शन पर सवाल खड़े करता है। खासकर इसलिए कि झालावाड़ और झालरापाटन को भाजपा के मजबूत क्षेत्रों में गिना जाता है। लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि नगर परिषद का परिणाम पूरे जिले या विधानसभा स्तर पर भाजपा की स्थिति बदलने का संकेत है। नगर निकाय चुनाव में स्थानीय समीकरण की भूमिका काफी ज्यादा होती है।

2028 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों चर्चा में हैं ये नतीजे?

राजस्थान के 2026 निकाय चुनाव को 2028 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थानीय परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। नगर निकाय के चुनाव में मतदाता अपने शहर, वार्ड और स्थानीय सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर मतदान करते हैं। इसलिए यहां का परिणाम विधानसभा चुनाव की तरह सीधे राज्य सरकार के पक्ष या विपक्ष में वोट नहीं माना जा सकता।

इसके बावजूद राजनीतिक दल निकाय चुनाव के परिणामों से अपने संगठन की जमीनी स्थिति का अंदाजा लगाते हैं। किस इलाके में पार्टी का स्थानीय नेटवर्क मजबूत है, कौन से उम्मीदवार लोगों के बीच पकड़ रखते हैं और किन वार्डों में संगठन कमजोर है, इसका पता ऐसे चुनावों से चलता है।

झालावाड़ का नतीजा इसी वजह से भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए ध्यान खींच रहा है। भाजपा के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में कांग्रेस की 29 सीटों की जीत पार्टी के स्थानीय संगठन के लिए सकारात्मक परिणाम है। वहीं भाजपा के लिए यह नतीजा वार्ड स्तर पर संगठन और उम्मीदवार चयन की समीक्षा का विषय बन सकता है।

राजस्थान Local Body Election Results Live: अभी क्या स्थिति है?

14 सितंबर को राजस्थान के सभी 309 शहरी निकायों के लिए मतगणना शुरू हो चुकी है। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू की गई। अलग-अलग निकायों में परिणाम घोषित होने के साथ सीटों की संख्या बदल रही है। इसलिए शुरुआती राज्यस्तरीय आंकड़ों को अंतिम परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।

झालावाड़ नगर परिषद में स्थिति फिलहाल स्पष्ट है। 45 वार्डों में कांग्रेस 29 सीट जीत चुकी है और उसे स्पष्ट बहुमत मिल गया है। इसके कारण नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनना लगभग तय है। स्थानीय परिणाम की पुष्टि करते हुए रिपोर्टों में भी कांग्रेस की 29 सीटों की जीत दर्ज की गई है।

राज्य के दूसरे निकायों के परिणाम आने के साथ राजस्थान में BJP और Congress के बीच कुल सीटों का अंतर बदलता रहेगा। निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका भी कई नगर निकायों में अहम रह सकती है। इसलिए राज्य की पूरी तस्वीर अंतिम आंकड़े आने के बाद ही साफ होगी।

झालावाड़ चुनाव का ताजा अपडेट

14 सितंबर 2026 को उपलब्ध नवीनतम पुष्टि के अनुसार झालावाड़ नगर परिषद के 45 वार्डों में कांग्रेस ने 29 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के साथ वसुंधरा राजे के मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माने जाने वाले झालावाड़ में भाजपा को स्थानीय निकाय स्तर पर बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस अब नगर परिषद में अपना बोर्ड बनाने की स्थिति में है। वहीं राजस्थान के बाकी शहरी निकायों में मतगणना और परिणामों का सिलसिला जारी है। निकाय प्रमुखों के चुनाव की अगली प्रक्रिया 21 सितंबर को निर्धारित है। t

Saket Kumar

Written by Saket Kumar

नमस्ते, मैं साकेत कुमार हूँ। पिछले 4+ सालों से मैं एक डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहा हूँ। ताज़ा ख़बरों, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और ख़ासकर टेक्नोलॉजी व मोबाइल अपडेट्स को आसान शब्दों में आप तक पहुँचाना मुझे बहुत पसंद है।"

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