नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। कई इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि लोगों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। सड़कों पर कीचड़ और मलबा जमा है और कई जगह रास्ते पूरी तरह बंद हैं। इस मुश्किल समय में भारत ने नेपाल की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) ने संसद में भारत की मदद के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत की तरफ से लगातार मानवीय मदद पहुंचाई जा रही है।
बालेन शाह ने कहा कि नेपाल में आई बाढ़ सामान्य नहीं थी। कई इलाकों में हालात बेहद खराब रहे। भारी मात्रा में कीचड़, पत्थर और मलबा जमा होने के कारण बड़ी मशीनों का पहुंचना तक मुश्किल हो गया था।
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जहां पहुंचना मुश्किल था, वहां भारतीय टीम ने संभाला मोर्चा
बाढ़ और भूस्खलन के बाद नेपाल की Army और Armed Police Force के जवान राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। लेकिन कुछ इलाके ऐसे भी थे, जहां हालात इतने खराब थे कि वहां पहुंचना आसान नहीं था।
ऐसे समय में भारत से भेजे गए विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों ने जोखिम उठाकर इन इलाकों तक पहुंचने की कोशिश की। आधुनिक उपकरणों की मदद से लोगों को मलबे और मुश्किल जगहों से निकालने का काम किया गया।
यही वजह है कि नेपाल की ओर से भारतीय टीम के काम की तारीफ की गई। मुश्किल हालात में भारतीय टीम ने राहत और बचाव अभियान में काफी मदद पहुंचाई।
भारत ने भेजी 70 टन से ज्यादा राहत सामग्री

नेपाल में राहत कार्य के लिए भारत की तरफ से बड़ी मात्रा में सामान भेजा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 70 टन से ज्यादा राहत सामग्री काठमांडू पहुंचाई गई।
इसमें जरूरी दवाइयां और दूसरी राहत सामग्री शामिल थी। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों के जरिए भी सामान नेपाल पहुंचाया गया।
पांचवें चरण में करीब 5.5 टन जरूरी जीवनरक्षक दवाएं भेजी गईं। इसके साथ ही 11 सदस्यों वाली एक विशेष बचाव टीम को भी नेपाल भेजा गया।
भारत की ओर से लगातार यह कोशिश की जा रही है कि बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान जल्द से जल्द पहुंच सके।
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बाढ़ में 1,127 लोगों की मौत, हजारों अब भी लापता

नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा ने बड़ी संख्या में लोगों की जिंदगी प्रभावित की है। बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में मरने वालों की संख्या 1,127 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 4,858 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
कई परिवार अपने घर और सामान खो चुके हैं। कुछ इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि लोगों के पास रहने तक की जगह नहीं बची है।
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शवों का अंतिम संस्कार करना भी बना बड़ी चुनौती
बाढ़ के बाद नेपाल के सामने एक और बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।
कई शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। ऐसे में अधिकारियों को सामूहिक रूप से शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोग अपनी परंपरा के अनुसार कुश यानी पवित्र घास से पुतला बनाकर अपने लापता और मृत परिजनों का अंतिम संस्कार भी कर रहे हैं।
काठमांडू और आसपास के इलाकों में शवों को रखने के लिए जगह की कमी होने के कारण प्रशासन को अलग व्यवस्था करनी पड़ी है। कई शवों को सुरक्षित रखने और बाद में पहचान होने पर उनके परिवारों को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है।
मुश्किल की इस घड़ी में भारत की ओर से मिली मदद नेपाल के लिए एक बड़ा सहारा बनी है। खासकर उन इलाकों में, जहां पहुंचना आसान नहीं था, वहां राहत और बचाव टीमों की मौजूदगी ने लोगों को काफी राहत दी है।

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