बिहार में जमीन के रिकॉर्ड को सही और अपडेट करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। विभाग के सचिव जय सिंह ने अंचल अधिकारियों को मौजा-वार अभियान चलाकर जमाबंदी की गलतियां ठीक करने और सरकारी जमीन के रिकॉर्ड की जांच तेज करने का निर्देश दिया है।
यह निर्देश 10 सितंबर 2026 को पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजस्व सर्वे प्रशिक्षण संस्थान में हुई समीक्षा बैठक में दिया गया। बैठक में बेगूसराय, मधुबनी और जमुई जिले के सभी अंचल अधिकारियों के साथ राजस्व कार्यों की समीक्षा की गई।
जमाबंदी रिकॉर्ड को किया जाएगा सही
बैठक में सचिव जय सिंह ने कहा कि मौजा-वार विशेष अभियान चलाकर जमाबंदी में मौजूद गलतियों को दूर किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही या मामलों को बिना वजह लंबे समय तक लंबित रखने की स्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी।
अधिकारियों को राजस्व महाअभियान के दौरान मिले आवेदनों का निपटारा केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि रिकॉर्ड की जांच और काम की गुणवत्ता के आधार पर करने को कहा गया है। इससे जमीन के रिकॉर्ड में मौजूद गलत नाम, रकबा और दूसरी जानकारी को सही करने की प्रक्रिया तेज होगी।
5 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन की होगी जांच
सरकारी जमीन को लेकर भी बैठक में खास निर्देश दिए गए। सचिव ने पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली सरकारी जमीन का प्राथमिकता के आधार पर सत्यापन करने को कहा है।
सरकारी प्लॉट से जुड़ी जमाबंदियों की भी जांच की जाएगी, ताकि रिकॉर्ड में दर्ज जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। इससे सरकारी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी या गलत प्रविष्टि की पहचान करने में मदद मिलेगी।
मृत रैयतों की जमाबंदी वारिसों के नाम होगी
मृत रैयतों के नाम पर लंबे समय से चल रही जमाबंदी को उनके पात्र उत्तराधिकारियों के नाम अपडेट करने पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों को अभियान चलाकर ऐसे मामलों की पहचान करने और उत्तराधिकार तथा बंटवारा नामांतरण की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
इससे पहले भी विभाग ने हर राजस्व कर्मचारी को अपने हलका में हर महीने कम से कम पांच मृत रैयतों की जमाबंदी के मामलों का निपटारा करने का लक्ष्य दिया था। विभाग का उद्देश्य पुराने रिकॉर्ड को अपडेट करना और जमीन के मालिकाना रिकॉर्ड को वर्तमान स्थिति के अनुसार दर्ज करना है।

लॉक जमाबंदियों को नियमानुसार अनलॉक करने का निर्देश
बैठक में लॉक की गई जमाबंदियों का मुद्दा भी सामने आया। सचिव ने ऐसी जमाबंदियों को नियमों के अनुसार अनलॉक करने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही जमीन से जुड़े लंबित मामलों की नियमित निगरानी करने और लोगों से जुड़ी राजस्व सेवाओं को तय समय में पूरा करने पर जोर दिया गया। विभाग ने अधिकारियों को अनावश्यक देरी से बचने के निर्देश दिए हैं।
फर्जी दस्तावेजों पर होगी कार्रवाई
जमीन के रिकॉर्ड से जुड़े फर्जी दस्तावेजों के मामलों में भी सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को गलत दस्तावेज सामने आने पर नियम के अनुसार कार्रवाई तेज करने को कहा गया है।
दाखिल-खारिज से जुड़े आवेदनों की भी जांच करने और गलत तरीके से तैयार किए गए दस्तावेजों या गलत जानकारी वाले मामलों पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
मापी के काम में पारदर्शिता पर जोर
विवादित जमीन की मापी से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने को भी कहा गया है। मापी से संबंधित शिकायतों और फीडबैक को गंभीरता से लेने तथा तय नियमों के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया।
सचिव ने यह भी कहा कि राजस्व महाअभियान के तहत मिलने वाले आवेदनों का निपटारा केवल अधिक संख्या दिखाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। प्रत्येक मामले में रिकॉर्ड और दस्तावेजों की सही जांच के बाद ही कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।
बेगूसराय, मधुबनी और जमुई की समीक्षा
समीक्षा बैठक में बेगूसराय, मधुबनी और जमुई के सभी अंचलों में चल रहे राजस्व कार्यों की स्थिति देखी गई। जमाबंदी सुधार, सरकारी जमीन का सत्यापन, नामांतरण, दाखिल-खारिज और लंबित मामलों की प्रगति पर अधिकारियों से जानकारी ली गई।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया अपडेट के अनुसार बैठक की अध्यक्षता सचिव जय सिंह ने की। विभाग ने बैठक के मुख्य निर्देशों में जमाबंदी शुद्धिकरण में तेजी और सरकारी भूमि के सत्यापन को प्राथमिकता देने की बात कही है।
बिहार में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अपडेट करने की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। विभाग की ओर से अंचल अधिकारियों को लंबित मामलों की निगरानी करते हुए जमाबंदी सुधार, मृत रैयतों के उत्तराधिकार नामांतरण और सरकारी जमीन के सत्यापन का काम तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
