बिहार के सारण जिले में सरयू और गंगा नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। रिविलगंज, छपरा सदर, दिघवारा और सोनपुर प्रखंड के कई हिस्सों में पानी फैल गया है। सबसे गंभीर स्थिति रिविलगंज के दिलिया रहीमपुर पंचायत के निचले इलाकों में बताई जा रही है, जहां कई घरों में चार से आठ फीट तक पानी पहुंच गया है।
पानी बढ़ने के बाद कई परिवारों ने घर छोड़कर सड़क किनारे और दूसरे ऊंचे स्थानों पर शरण ली है। कुछ लोग तिरपाल लगाकर अस्थायी तौर पर रहने को मजबूर हैं। बाढ़ के कारण पीने के पानी, शौचालय और पशुओं के चारे की समस्या भी सामने आ रही है।
चार दिनों से लगातार बढ़ रहा पानी
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले चार दिनों से इलाके में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। देखते ही देखते निचले हिस्से पानी से घिर गए और कई घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया।
दिलिया रहीमपुर पंचायत में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। यहां कई घरों में चार से आठ फीट तक पानी जमा होने की बात सामने आई है। पंचायत का सामुदायिक भवन भी पानी की चपेट में आ चुका है।
पानी बढ़ने के बाद लोगों के सामने घर में रहना मुश्किल हो गया। कई परिवार जरूरी सामान लेकर सुरक्षित और ऊंची जगहों की तरफ चले गए हैं।
ग्रामीणों की शिकायत, हर साल आती है बाढ़

ग्रामीणों का कहना है कि सरयू का जलस्तर बढ़ने पर इलाके में हर साल बाढ़ की स्थिति बनती है। इसके बावजूद पंचायत के निचले हिस्से को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित नहीं किए जाने की शिकायत ग्रामीण कर रहे हैं।
उनका कहना है कि इस वजह से उन्हें सरकारी राहत योजनाओं का फायदा नहीं मिल पाता। इस बार नदी में पानी बढ़ने के साथ परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, अभी तक कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेने नहीं आया है।
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शौचालय और पीने के पानी का संकट
बाढ़ का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। पानी भरने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी मुश्किल हो गई है।
कई घरों के शौचालयों के सेफ्टी टैंक पानी से भर गए हैं, जिसके कारण उनका इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक प्रशासन की तरफ से अस्थायी शौचालय की व्यवस्था नहीं की गई है।
महिलाओं और बच्चियों को शौच के लिए दूर जाना पड़ रहा है। वहीं, पीने और दूसरे घरेलू कामों के लिए लोगों को पानी खरीदकर इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
मवेशियों के चारे की भी बढ़ी परेशानी
इलाके में पानी फैलने का असर पशुपालकों पर भी पड़ा है। चारों तरफ पानी होने के कारण हरा और सूखा चारा आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
मवेशियों को पालने वाले ग्रामीण अब बाजार से चारा खरीदकर काम चला रहे हैं। ऐसे में बाढ़ के बीच परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव भी बढ़ गया है।.
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विस्थापित परिवारों के लिए अब तक सामुदायिक रसोई नहीं

ग्रामीण अशोक कुमार के मुताबिक, लगातार बढ़ते पानी के कारण कई लोग अपना घर छोड़ चुके हैं। प्रभावित परिवार सड़क किनारे तिरपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं।
उनका कहना है कि इतने लोगों के विस्थापित होने के बावजूद अभी तक सामुदायिक रसोई शुरू नहीं हुई है। ग्रामीण चाहते हैं कि दिलिया रहीमपुर के निचले हिस्से को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जाए और लोगों तक राहत सामग्री व जरूरी सुविधाएं पहुंचाई जाएं।
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प्रशासन से राहत की उम्मीद
ग्रामीणों की शिकायतों और राहत व्यवस्था को लेकर जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव से संपर्क करने का प्रयास किया गया। हालांकि, कार्यालय में इंतजार के दौरान उनके निरीक्षण के लिए निकल जाने की जानकारी मिली और तत्काल इस मामले पर कोई जवाब उपलब्ध नहीं हो सका।
फिलहाल प्रभावित परिवारों की नजर प्रशासन की ओर है। पानी लगातार बढ़ने की स्थिति में ग्रामीणों को राहत, पीने के पानी, शौचालय और मवेशियों के चारे जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है।
Conclusion
सारण में सरयू और गंगा के बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई परिवार घर छोड़कर सड़क किनारे रह रहे हैं और रोजमर्रा की जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान हैं। अब प्रभावित ग्रामीण प्रशासन से जल्द राहत और जरूरी व्यवस्था शुरू किए जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
