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बिहार के 18 जिलों में बाढ़ से 6.65 लाख लोग प्रभावित, सारण में बांध टूटा और बेगूसराय में घरों में घुसा पानी

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 18 जिलों में 6.65 लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए गए हैं और गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन तथा घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

बाढ़ के कारण निचले इलाकों में घरों, सड़कों, खेतों और सरकारी संस्थानों में पानी पहुंच गया है। प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है तथा प्रभावित इलाकों में नावों और आपदा राहत टीमों की तैनाती की गई है।

शुक्रवार को जारी राज्य की बाढ़ स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, 18 जिलों में सरकारी स्तर पर राहत और बचाव कार्य चल रहे हैं। प्रशासन की ओर से 693 नावें संचालित की जा रही हैं, जबकि NDRF की छह और SDRF की 27 टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं।

सारण में माही नदी का बांध टूटा

सारण जिले में माही नदी के बढ़ते जलस्तर और दबाव के बीच बांध टूटने से आसपास के इलाकों में पानी फैल गया। छपरा सदर, दिघवारा, रिविलगंज और सोनपुर के करीब 25 पंचायत बाढ़ से प्रभावित हैं और लगभग डेढ़ लाख लोगों पर इसका असर पड़ा है।

ग्रामीण इलाकों में कई सड़कों पर पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित हुआ है। अकिलपुर-दिघवारा संपर्क भी बाधित हुआ है और कुछ स्थानों पर लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई परिवार ऊंचे स्थानों और बांधों पर शरण ले रहे हैं। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

बेगूसराय में घरों तक पहुंचा पानी

बेगूसराय में गंगा का जलस्तर बढ़ने से स्थिति कई इलाकों में गंभीर बनी हुई है। मटिहानी, साहेबपुर कमाल, बखरी और बलिया की करीब 20 पंचायतों की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।

कई निचले इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया है और बड़ी संख्या में परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से बेगूसराय में 87 नावें चलाए जाने की जानकारी सामने आई है।

जलभराव और आवागमन की समस्या के कारण जिले में 60 से अधिक स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हुई है। इससे पहले मटिहानी क्षेत्र में गंगा का पानी 17 सरकारी विद्यालयों तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके बाद शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों से टैग किया गया।

बेगूसराय में अगस्त के दौरान भी गंगा के दबाव के कारण रिंग बांध का एक हिस्सा टूट चुका है। उस घटना में पानी कई गांवों तक पहुंचा था और सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित हुई थी। जल संसाधन विभाग की टीमें ऐसे संवेदनशील बांधों की निगरानी और मरम्मत में लगी हुई हैं।

खगड़िया में स्कूल और मंदिर भी प्रभावित

खगड़िया में भी नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर निचले इलाकों पर पड़ा है। बूढ़ी गंडक का पानी खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण जिले के कई हिस्सों में जलभराव और आवागमन की समस्या बनी हुई है।

बाढ़ के पानी से ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों और धार्मिक स्थलों तक पानी पहुंचने की स्थिति सामने आई है। कई जगहों पर स्थानीय लोगों को सामान्य आवाजाही के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

जिले में पहले से बाढ़ की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर काम किया गया था। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मानसून से पहले खगड़िया समेत उत्तर बिहार के बाढ़ संभावित जिलों में तटबंध, निकासी, राहत शिविर और बचाव व्यवस्था की समीक्षा की थी।

पटना के नौ प्रखंडों में 2.32 लाख लोग प्रभावित

पटना जिले में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में बाढ़ का असर बढ़ा है। जिले के नौ प्रखंडों की करीब 2.32 लाख आबादी प्रभावित बताई गई है।

प्रभावित लोगों के लिए जिला प्रशासन ने आठ सामुदायिक रसोई शुरू की हैं। इन केंद्रों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और प्रशासन की टीमें जलस्तर तथा राहत की जरूरत पर लगातार नजर रख रही हैं।

पटना समेत भोजपुर, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद के निचले इलाकों को लेकर प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी रखी गई है।

भोजपुर में सड़क और स्कूल बंद

भोजपुर जिले के छह प्रखंडों की 45 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं और करीब दो लाख लोगों पर इसका असर पड़ा है। दो हजार एकड़ से अधिक धान की फसल और करीब 500 एकड़ में भदई फसल तथा सब्जियां पानी की चपेट में आई हैं।

बाढ़ के पानी के तेज बहाव के कारण 25 मुख्य और ग्रामीण सड़कों पर आवागमन बंद है। जिले में 60 से अधिक स्कूल बंद किए गए हैं और प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई के माध्यम से भोजन की व्यवस्था की जा रही है।

वैशाली और बक्सर में भी बढ़ी परेशानी

वैशाली जिले के छह प्रखंडों की 26 पंचायतों और हाजीपुर नगर परिषद के छह वार्डों में बाढ़ का असर है। राघोपुर, सहदेई-देसरी और बिदुपुर के कई इलाकों में सड़कों पर पानी पहुंचने से यातायात प्रभावित हुआ है।

राघोपुर की कुछ सड़कों पर नाव चल रही है और प्रभावित परिवार ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं। प्रशासन की ओर से राहत सामग्री और बचाव व्यवस्था पर निगरानी रखी जा रही है।

बक्सर में भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जिले के कई गांवों में करीब दस हजार लोग प्रभावित हुए हैं और 1,761 हेक्टेयर फसल बाढ़ की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है। दो प्राथमिक विद्यालयों में भी पानी पहुंचा है।

भागलपुर में शहर तक पहुंचा बाढ़ का पानी

भागलपुर में गंगा की बाढ़ का पानी शहरी क्षेत्र में भी प्रवेश कर गया है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन और परिसर में पानी फैलने की स्थिति बनी, जबकि भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग परिसर भी प्रभावित हुआ है।

सुल्तानगंज स्थित अजगैवीनाथ मंदिर परिसर में भी गंगा का पानी पहुंच गया है। इसके कारण श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। खरीक प्रखंड की राघोपुर पंचायत में भी बड़ी संख्या में घर और आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई गई है।

नदियों का जलस्तर अभी भी चिंता का कारण

केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार गंगा कई निगरानी केंद्रों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा का जलस्तर भी अलग-अलग स्थानों पर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया है।

लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण राज्य के कई हिस्सों में ग्रामीण सड़कें प्रभावित हुई हैं। ग्रामीण कार्य विभाग के अनुसार 200 से अधिक सड़कों पर पानी पहुंचा है, जबकि कई सड़कों को नुकसान भी हुआ है।

बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ा है। कई जिलों में धान, मक्का, सब्जियों और अन्य फसलों के खेतों में पानी भर गया है। पशुधन को भी प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और चारे की व्यवस्था करने की जरूरत बढ़ी है।

राहत और बचाव अभियान जारी

राज्य प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी रखा है। NDRF और SDRF की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं और सरकारी नावों के जरिए लोगों तथा राहत सामग्री की आवाजाही कराई जा रही है।

प्रशासन ने जलभराव वाले इलाकों में लोगों से सावधानी बरतने और नदी, घाट तथा तेज बहाव वाले पानी के पास नहीं जाने की अपील की है। प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक रसोई, राहत सामग्री और जरूरत के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

मौसम और नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है। 5 सितंबर 2026 तक बिहार के 18 जिलों में बाढ़ का असर बना हुआ है और 6.65 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट के बीच राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं।

Saket Kumar

Written by Saket Kumar

नमस्ते, मैं साकेत कुमार हूँ। पिछले 4+ सालों से मैं एक डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहा हूँ। ताज़ा ख़बरों, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और ख़ासकर टेक्नोलॉजी व मोबाइल अपडेट्स को आसान शब्दों में आप तक पहुँचाना मुझे बहुत पसंद है।"

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