भोपाल में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शासकीय कार्य से जुड़ी शिकायतों पर आपराधिक कार्रवाई अब सीधे नहीं की जा सकेगी। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस इकाइयों को निर्देश जारी कर कहा है कि राजपत्रित पुलिस अधिकारी के खिलाफ उसके पदीय दायित्व से जुड़े मामले में अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाने से पहले शासन से अनुमति लेना जरूरी होगा।
पुलिस मुख्यालय की अपराध अनुसंधान शाखा की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि केवल शिकायत के आधार पर किसी राजपत्रित अधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी। पहले यह देखा जाएगा कि शिकायत में अधिकारी द्वारा पद के दुरुपयोग का मामला बनता है या नहीं।
सभी पुलिस इकाइयों को भेजे गए निर्देश
पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश की सभी जिला और पुलिस इकाइयों को इस व्यवस्था का पालन करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम ग्वालियर हाई कोर्ट की खंडपीठ के 19 जुलाई 2026 के आदेश के बाद उठाया गया है।
पुलिस मुख्यालय के निर्देश में हाई कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें आवश्यक अभियोजन स्वीकृति के बिना दर्ज शिकायत के आधार पर निचली अदालत की कार्रवाई को निरस्त किया गया था। इसके बाद पुलिस इकाइयों को संबंधित न्यायिक आदेश का अध्ययन करने और जरूरत पड़ने पर उसका पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सरकारी काम से जुड़े मामलों में लागू होगी व्यवस्था
नई व्यवस्था का संबंध उन शिकायतों से है जिनमें पुलिस अधिकारी पर उसके आधिकारिक या पदीय दायित्व के दौरान किए गए कथित कृत्य को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। ऐसे मामलों में कानून के तहत न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने से पहले शासन की अभियोजन स्वीकृति आवश्यक होगी।
इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत नहीं की जा सकती। भोपाल पुलिस के नागरिक पोर्टल पर नागरिक पुलिस अधिकारियों और पुलिस थानों से संबंधित शिकायत दर्ज करा सकते हैं तथा शिकायत की जांच और उसकी स्थिति की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
राजपत्रित अधिकारियों पर विशेष प्रावधान
पुलिस मुख्यालय के निर्देश में खास तौर पर राजपत्रित अधिकारियों का उल्लेख किया गया है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ यदि आरोप उनके सरकारी दायित्व से सीधे जुड़े हैं, तो अभियोजन शुरू करने की प्रक्रिया में शासन की पूर्व स्वीकृति का प्रावधान लागू होगा।
अधिकारियों के खिलाफ किसी शिकायत को आगे बढ़ाने से पहले उसके आरोपों और संबंधित सरकारी कार्य के बीच संबंध की जांच की जाएगी। यदि मामला पद के दुरुपयोग या सरकारी कर्तव्य से बाहर की गतिविधि से संबंधित पाया जाता है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अलग हो सकती है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद बदली प्रक्रिया
ग्वालियर हाई कोर्ट की 19 जुलाई 2026 की कार्यवाही इस नई प्रक्रिया का प्रमुख आधार बनी है। पुलिस मुख्यालय ने इसी न्यायिक आदेश के संदर्भ में सभी इकाइयों को कानून के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी कामकाज से जुड़े मामलों में अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक अभियोजन शुरू करने से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना है। वहीं नागरिकों की शिकायत दर्ज कराने और उसकी जांच की प्रक्रिया पहले की तरह उपलब्ध रहेगी।
फिलहाल पुलिस मुख्यालय के निर्देश प्रदेश की सभी संबंधित पुलिस इकाइयों को भेजे जा चुके हैं और शासकीय कार्य से जुड़े मामलों में अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से ध्यान में रखने को कहा गया है।
