बिहार में BJP और JDU के बीच गठबंधन कायम है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में JDU के रुख ने NDA के अंदर सियासी समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। फरक्का जल संधि पर पार्टी का आक्रामक अभियान, विधान परिषद के सभापति पद पर दावेदारी, 12 जिलों में नीतीश संवाद और नीतीश कुमार के राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर बदलता रुख ऐसे संकेत हैं जिनसे गठबंधन के भीतर खींचतान की अटकलें तेज हुई हैं।
फरक्का जल संधि पर JDU का अलग रुख
JDU ने बांग्लादेश के साथ 1996 में हुई फरक्का जल संधि को लेकर बिहार के हितों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। इस संधि की 30 साल की अवधि दिसंबर 2026 में पूरी हो रही है और JDU चाहती है कि किसी भी नए समझौते में बिहार की जल जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।
पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की अगुवाई में 5 सितंबर से नीतीश संवाद कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह अभियान गंगा किनारे बसे बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार समेत 12 जिलों में चलाया जा रहा है।
बेगूसराय में 8 सितंबर को संजय झा ने कहा कि सत्ता रहे या ना रहे, बिहार के पानी से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने फरक्का बराज और जल संधि को बिहार में बाढ़ तथा जल संकट से जोड़ते हुए कहा कि JDU इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।
विधान परिषद सभापति पद पर JDU की दावेदारी
बिहार विधान परिषद के सभापति पद को लेकर भी NDA के भीतर चर्चा तेज है। फिलहाल इस पद पर BJP के MLC अवधेश नारायण सिंह हैं, लेकिन JDU की ओर से इस संवैधानिक पद पर दावा किए जाने की चर्चा सामने आई है।
JDU की दावेदारी के पीछे यह तर्क बताया जा रहा है कि बिहार में विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद सभापति दोनों महत्वपूर्ण संवैधानिक पद BJP के पास हैं। ऐसे में सत्ता साझेदारी के संतुलन के लिए विधान परिषद सभापति का पद JDU को दिए जाने की मांग की जा रही है।
हालांकि, इस दावेदारी को लेकर अंतिम फैसला गठबंधन के स्तर पर होना बाकी है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक बातचीत और संभावित सत्ता-संतुलन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
12 जिलों में नीतीश संवाद से संगठन पर फोकस
JDU का नीतीश संवाद केवल फरक्का जल संधि पर चर्चा तक सीमित नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेता सीधे गंगा किनारे के जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से संवाद कर रहे हैं।
पार्टी का कहना है कि फरक्का जल संधि की वजह से बिहार की समस्याओं और आने वाली पीढ़ियों की जल जरूरतों पर व्यापक चर्चा जरूरी है। इस अभियान के जरिए JDU बिहार के हितों से जुड़े मुद्दे को राज्य के स्तर पर प्रमुख राजनीतिक विषय बनाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक तौर पर इस अभियान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि JDU केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा है। इसके बावजूद पार्टी इस मुद्दे पर अपनी अलग राजनीतिक लाइन खुलकर सामने रख रही है।
नीतीश के उत्तराधिकारी को लेकर बदला रुख

NDA के भीतर चर्चा का एक और कारण नीतीश कुमार के राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर JDU का बदला हुआ रुख है। सरकार बनने के बाद सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का राजनीतिक उत्तराधिकारी बताए जाने की चर्चाएं थीं, लेकिन बाद में JDU के भीतर निशांत कुमार का नाम भविष्य की राजनीति से जोड़कर सामने आने लगा।
निशांत कुमार को लेकर JDU नेताओं की सक्रियता ने यह सवाल खड़ा किया है कि पार्टी लंबी अवधि के लिए अपनी राजनीतिक विरासत को किस दिशा में ले जाना चाहती है। हालांकि, निशांत कुमार को मुख्यमंत्री पद का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किए जाने जैसी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
सम्राट चौधरी और JDU के बीच समीकरण
बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार चल रही है और BJP तथा JDU दोनों NDA का हिस्सा हैं। सम्राट चौधरी ने हालिया बातचीत में नीतीश कुमार को पिता तुल्य बताया और उनके विशेष आशीर्वाद का जिक्र किया, जिससे दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक स्तर पर सम्मान का संदेश गया है।
इसके बावजूद JDU के हालिया राजनीतिक कदमों को लेकर गठबंधन के भीतर भविष्य की भूमिका और हिस्सेदारी पर चर्चा शुरू हो गई है। सभापति पद की दावेदारी और अलग राजनीतिक अभियान इसी सत्ता-संतुलन की बहस को आगे बढ़ाते हैं।
फिलहाल BJP और JDU के बीच गठबंधन टूटने या अलग होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। JDU का फरक्का जल संधि अभियान जारी है, 12 जिलों में नीतीश संवाद कार्यक्रम हो रहे हैं और विधान परिषद सभापति पद को लेकर अंतिम तस्वीर सामने आना अभी बाकी है।
