सीतामढ़ी में पिछले कुछ समय से अगर किसी प्रशासनिक अधिकारी की सबसे ज्यादा चर्चा हुई है, तो उसमें रिची पांडे IAS का नाम सबसे आगे आता है। आम लोगों की समस्याएं सुनने से लेकर अधिकारियों पर कार्रवाई तक, उनके काम करने का तरीका लगातार चर्चा में रहा है।
रिची पांडे 2016 बैच के बिहार कैडर के IAS अधिकारी हैं और मार्च 2024 से सीतामढ़ी के जिला पदाधिकारी (DM) के रूप में काम कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में जनता दरबार, भूमि विवाद, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई मामलों पर उन्होंने सीधे नजर रखी है।
यही वजह है कि सीतामढ़ी में उनकी एक ऐसी छवि बनी, जिसमें एक तरफ लोगों की बात सुनने वाला अधिकारी दिखाई देता है तो दूसरी तरफ लापरवाही और गड़बड़ी के मामलों में सख्त कार्रवाई करने वाला DM भी नजर आता है।
जनता के बीच जाकर सुनते हैं लोगों की समस्या
रिची पांडे की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजहों में से एक जनता से सीधा संवाद है। जनता दरबार में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते रहे हैं।
सितंबर 2025 में आयोजित एक जनता दरबार में 123 लोगों की शिकायतें सुनी गई थीं। इनमें भूमि विवाद, पेंशन, अतिक्रमण और स्वास्थ्य से जुड़े मामले शामिल थे। अधिकारियों को इन मामलों पर जल्द कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे।
2024 में भी जनता की समस्याओं को लेकर उन्होंने एक अलग पहल की थी। उन्होंने निर्देश दिया था कि सिर्फ DM कार्यालय में ही नहीं, बल्कि अलग-अलग विभागों के अधिकारी भी हर शुक्रवार जनता दरबार लगाएं।
इस फैसले का सीधा फायदा ग्रामीण इलाकों के लोगों को मिल सकता था, क्योंकि छोटी-छोटी समस्याओं के लिए लोगों को 40 से 50 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय आने की परेशानी होती थी। इसी फैसले को लेकर उस समय मीडिया में उनकी काफी चर्चा हुई थी।
छोटी समस्या को भी नजरअंदाज नहीं करने की कोशिश
आम लोगों के लिए जमीन, पेंशन, राशन कार्ड, आवास, बिजली, पानी और सड़क जैसी समस्याएं छोटी नहीं होतीं। कई बार इन्हीं समस्याओं के लिए लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
रिची पांडे के जनता दरबार में भी इस तरह के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। 2026 में आयोजित जनसुनवाई में भूमि विवाद, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, बिजली, पेयजल, सड़क, राशन कार्ड और अतिक्रमण से जुड़ी शिकायतें सुनी गईं। अधिकारियों को इनके समाधान के लिए जरूरी निर्देश दिए गए।
यही सीधा तरीका लोगों को पसंद आया। लोगों को लगा कि उनकी समस्या कम से कम जिला प्रशासन के सामने सीधे रखी जा सकती है।

जमीन से जुड़े मामलों पर भी नजर
सीतामढ़ी में भूमि विवाद लंबे समय से लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण रहे हैं। इसी वजह से राजस्व विभाग के कामकाज पर भी DM की ओर से लगातार समीक्षा की गई।
ऑनलाइन म्यूटेशन, परिमार्जन प्लस, अभियान बसेरा, भू-समाधान और जमीन से जुड़े दूसरे मामलों की समीक्षा करते हुए रिची पांडे ने अधिकारियों को काम में लापरवाही नहीं करने और समय पर मामलों का निपटारा करने के निर्देश दिए।
यानी उनकी कोशिश सिर्फ शिकायत सुनने तक नहीं रही, बल्कि संबंधित विभाग के काम की भी निगरानी की गई।
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सख्त अधिकारी की छवि भी बनी
रिची पांडे की पहचान सिर्फ लोगों की समस्या सुनने वाले DM की नहीं बनी। प्रशासनिक काम में लापरवाही मिलने पर सख्ती को लेकर भी वह चर्चा में रहे हैं।
अगस्त 2026 में सीतामढ़ी के जिला परिवहन कार्यालय में शिकायतों के बाद अचानक निरीक्षण की खबर सामने आई। इसके बाद दो होमगार्ड कर्मियों के खिलाफ निलंबन और प्राथमिकी से जुड़ी कार्रवाई की जानकारी सामने आई। कार्यालय में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भी निर्देश दिए गए।
इस घटना के बाद एक बार फिर उनकी सख्त प्रशासनिक शैली की चर्चा हुई।
सिर्फ कार्यालय में बैठकर काम करने वाले अधिकारी नहीं
किसी DM की जिम्मेदारी सिर्फ सरकारी फाइलों और बैठकों तक सीमित नहीं होती। जिले की कानून-व्यवस्था, विकास कार्य, सरकारी योजनाएं और जनता की शिकायतें भी उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा होती हैं।
रिची पांडे के कार्यकाल में जनता दरबार और जनसुनवाई के जरिए लोगों से सीधे संपर्क की कोशिश लगातार दिखाई दी। सितंबर 2025 में जनता दरबार को नए तरीके से आयोजित करने की बात भी सामने आई, जिसमें अलग-अलग स्तर के विभागीय अधिकारियों को जोड़ने की व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य लोगों की शिकायतों का जल्द समाधान करना था।
यही वजह है कि उनकी पहचान सिर्फ कलेक्ट्रेट तक सीमित नहीं रही।
पुनौरा धाम के विकास में भी निभाई भूमिका
सीतामढ़ी की पहचान मां जानकी की जन्मभूमि के रूप में होती है। ऐसे में पुनौरा धाम का विकास जिले के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पुनौरा धाम में विकास और भूमि अधिग्रहण से जुड़े कामों की निगरानी में भी रिची पांडे की भूमिका रही है। 2024 में पर्यटन विभाग की टीम के साथ उन्होंने स्थल का निरीक्षण किया था और करीब 50 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री की पुनौरा धाम विकास संबंधी समीक्षा बैठक में भी जिलाधिकारी रिची पांडे ने प्रस्तावित मंदिर और क्षेत्र के विकास कार्यों की प्रगति पर प्रस्तुतीकरण दिया था।
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लोगों के बीच बनी अलग पहचान
किसी अधिकारी की लोकप्रियता को आंकने के लिए कोई एक पैमाना नहीं होता। लेकिन रिची पांडे के मामले में जनता दरबार, आम लोगों की समस्याओं पर सुनवाई, अधिकारियों को समय पर कार्रवाई के निर्देश और प्रशासनिक सख्ती जैसी बातें बार-बार सामने आती हैं।
इसी वजह से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर उनके काम को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिली हैं।
हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि सीतामढ़ी की पूरी जनता उनके काम से खुश थी या हर व्यक्ति उनकी कार्यशैली से सहमत था। ऐसी बात साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक जनमत सर्वे उपलब्ध नहीं है। लेकिन उपलब्ध खबरों से यह जरूर पता चलता है कि आम लोगों के बीच उनकी एक मजबूत और अलग पहचान बनी।
आखिर रिची पांडे को लोग क्यों याद रखते हैं?
अगर उनकी पूरी कार्यशैली को आसान शब्दों में समझें तो चार बातें सबसे ज्यादा सामने आती हैं।
पहली, जनता की बात सुनना।
दूसरी, समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी देना।
तीसरी, लापरवाही मिलने पर सख्ती दिखाना।
और चौथी, जिले के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण कामों पर खुद नजर रखना।
यही चार चीजें मिलकर किसी अधिकारी की छवि बनाती हैं। रिची पांडे के मामले में भी यही देखने को मिला।
रिची पांडे IAS की शिक्षा और करियर
रिची पांडे का प्रशासनिक सफर भी युवाओं के लिए खास है। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद MBA किया और UPSC Civil Services Examination में सफलता हासिल की।
IAS बनने के बाद उन्होंने बिहार में अलग-अलग प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। महुआ में SDO, बेगूसराय और पटना में DDC तथा जहानाबाद में DM जैसी जिम्मेदारियों के बाद उन्हें मार्च 2024 में सीतामढ़ी का जिलाधिकारी बनाया गया।
उनके प्रशासनिक सफर की एक खास बात यह है कि अलग-अलग पदों पर काम करने के बाद उन्हें जिले की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने का अनुभव मिला।
निष्कर्ष
रिची पांडे IAS की सीतामढ़ी में पहचान सिर्फ एक DM के तौर पर नहीं बनी, बल्कि उनके काम करने के तरीके से बनी।
जनता दरबार में लोगों की समस्याएं सुनना, जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों पर नजर रखना, सरकारी योजनाओं की समीक्षा करना और जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक सख्ती दिखाना उनके कार्यकाल की प्रमुख बातें रही हैं।
इसी वजह से सीतामढ़ी में उनके नाम की चर्चा आम लोगों से लेकर युवाओं तक होती रही है। किसी अधिकारी के लिए इससे बड़ी बात शायद यही होती है कि लोग उसके पद से ज्यादा उसके काम को याद रखें।
पद से पहचान मिल सकती है, लेकिन लोगों का भरोसा काम से ही बनता है। रिची पांडे की सीतामढ़ी वाली पहचान को समझने के लिए यही बात सबसे ज्यादा मायने रखती है।
