भारत में Sugar Price लगातार बढ़ने से त्योहारों से पहले सरकार की चिंता बढ़ गई है। देश के कई हिस्सों में खुदरा चीनी की कीमत 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत कीमत भी करीब 52 रुपये प्रति किलो के आसपास है। ऐसे समय में जब Ganesh Chaturthi, Dussehra और Diwali जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं, सरकार Sugar Supply बढ़ाने के लिए Import और अन्य कदमों पर विचार कर रही है।
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E20 Ethanol Programme से कैसे जुड़ा है Sugar Price Crisis?
विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी की बढ़ती कीमत के पीछे सबसे बड़ा कारण Sugarcane Diversion to Ethanol हो सकता है। भारत पेट्रोल में Ethanol Blending बढ़ाकर E20 Target को आगे बढ़ा रहा है। इसके लिए बड़ी मात्रा में गन्ने से Ethanol तैयार किया जा रहा है।
गन्ने का एक हिस्सा चीनी उत्पादन के बजाय Ethanol Production में जाने से बाजार में Sugar Supply पर दबाव बढ़ा है। हालांकि देश में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ा है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर उस गन्ने का कितना हिस्सा चीनी बनाने में इस्तेमाल हो रहा है और कितना Fuel Programme के लिए जा रहा है।
रिकॉर्ड Sugar Prices ने सरकार की बढ़ाई चिंता

महाराष्ट्र के प्रमुख Sugar Trading Centre कोल्हापुर में थोक चीनी की कीमत अगस्त की शुरुआत से करीब 20% बढ़कर 5,350 रुपये प्रति 100 किलो तक पहुंच गई। पंजाब सहित कुछ राज्यों में Retail Price करीब 65 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है।
त्योहारों में मिठाई और खाद्य उत्पादों की Demand बढ़ने वाली है। ऐसे में यदि कीमतों पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ, तो Festive Season Inflation आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाल सकती है।
क्या India Sugar Import करेगा?
भारत दुनिया के बड़े Sugar Producing और Exporting Countries में शामिल रहा है। लेकिन अब घरेलू Supply बढ़ाने के लिए सरकार 100% Import Duty हटाने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो करीब एक दशक बाद बड़े स्तर पर Sugar Import का रास्ता खुल सकता है।
सरकार पहले ही Sugar Export पर सख्ती कर चुकी है। इसके बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ती रहीं। अब Import के साथ-साथ Bulk Traders के लिए Stock Limit लगाने और Hoarding रोकने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
Crop Disease और कम Sugar Recovery भी बनी वजह
मामला सिर्फ Ethanol Diversion तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश सहित कुछ क्षेत्रों में Crop Disease के कारण Sugarcane Productivity और Sugar Recovery प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। यानी गन्ने की खेती बढ़ने के बावजूद उससे बनने वाली चीनी की मात्रा उम्मीद के अनुसार नहीं बढ़ी।
E20 बनाम Food Prices: सरकार के सामने बड़ा सवाल
भारत के लिए Ethanol Blending Programme तेल आयात पर निर्भरता कम करने और Energy Security बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। लेकिन अगर Fuel के लिए गन्ने का ज्यादा इस्तेमाल घरेलू Sugar Prices को बढ़ाता है, तो सरकार को Food versus Fuel की चुनौती का संतुलन बनाना होगा।
आने वाले दिनों में सरकार का फैसला बेहद अहम होगा। Sugar Import, Import Duty Cut, Stock Limits और Ethanol Diversion में बदलाव जैसे कदम तय करेंगे कि Diwali से पहले चीनी की कीमतों को कितना नियंत्रित किया जा सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या E20 की रफ्तार और आम लोगों की रसोई, दोनों के बीच सही संतुलन बन पाएगा?

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