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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CCTV फुटेज न मिलने पर देवरिया पुलिस को फटकारा, चार लोगों को ₹65 हजार मुआवजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया के गौरी बाजार पुलिस स्टेशन में चार लोगों की कथित illegal detention के मामले में CCTV footage उपलब्ध नहीं कराने पर पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। Justice Atul Sreedharan और Justice Divesh Chandra Samant की Division Bench ने उत्तर प्रदेश सरकार को चारों याचियों को कुल ₹65,000 compensation देने का आदेश दिया है, जिसकी वसूली संबंधित SHO के वेतन से की जाएगी।

मामला Mahendra Gaur और तीन अन्य की ओर से दाखिल Habeas Corpus petition से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें Deoria के Gauri Bazar Police Station में 13 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच अलग-अलग अवधि तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था, जिसमें कुछ लोगों की हिरासत करीब 10 दिनों तक बताई गई।

CCTV फुटेज को लेकर कोर्ट के सवाल

हाईकोर्ट ने पहले पुलिस स्टेशन के अंदर की CCTV recordings पेश करने का निर्देश दिया था, ताकि याचिका में लगाए गए आरोपों की सच्चाई की जांच की जा सके। बाद में State की ओर से बताया गया कि संबंधित अवधि में CCTV recording system में technical fault था और फुटेज उपलब्ध नहीं है।

2 सितंबर 2026 को इस जवाब के बाद कोर्ट ने Deoria SP Abhijit R. Shankar और संबंधित SHO को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। 9 सितंबर की सुनवाई में दोनों अधिकारियों से CCTV system के खराब होने और रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने को लेकर विस्तार से सवाल किए गए।

SHO ने कोर्ट को बताया कि CCTV system में 12 अप्रैल 2026 को खराबी आई थी। कोर्ट ने पूछा कि यदि कैमरा बाद में काम कर रहा था तो संबंधित अवधि की recording कहां है और CCTV खराब होने या उसकी मरम्मत से जुड़ी General Diary (GD) entry क्यों नहीं की गई। SHO ने माना कि इस संबंध में कोई GD entry नहीं की गई थी।

SP और SHO पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान Justice Atul Sreedharan ने पुलिस अधिकारियों की explanation पर नाराजगी जताई और उन्हें ‘bunch of liars’ कहा। कोर्ट ने CCTV system के खराब होने, उसके repair और footage के गायब होने के संबंध में अधिकारियों के जवाबों पर गंभीर सवाल उठाए।

कोर्ट ने Deoria SP से यह भी पूछा कि यदि SHO की ओर से CCTV व्यवस्था को लेकर लापरवाही हुई थी तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। SP ने बताया कि SHO को Crime Branch भेज दिया गया है, लेकिन Bench इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुई।

जब SP ने कोर्ट से माफी मांगी तो Justice Sreedharan ने कहा, ‘Don’t apologize to the Court. Apologize to the people’. कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि SHO को suspend या terminate करने जैसी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

चार याचियों को ₹65 हजार मुआवजा

हाईकोर्ट ने चारों याचियों को illegal detention के लिए कुल ₹65,000 compensation देने का निर्देश दिया। इसमें petitioner number 2, 3 और 4 को ₹20,000-₹20,000 तथा petitioner number 1 को ₹5,000 दिए जाएंगे।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पूरी compensation राशि संबंधित SHO के salary से recover की जाएगी। इस तरह आदेश में SHO को compensation की व्यक्तिगत वित्तीय जिम्मेदारी का सामना करना होगा।

याचिकाकर्तामुआवजा
Petitioner No. 1₹5,000
Petitioner No. 2₹20,000
Petitioner No. 3₹20,000
Petitioner No. 4₹20,000
कुल₹65,000

₹5 लाख की व्यक्तिगत penalty की चेतावनी

कोर्ट ने CCTV records उपलब्ध नहीं होने और पुलिस अधिकारियों की explanation से जुड़े मामले में SP और SHO को व्यक्तिगत financial penalty की चेतावनी भी दी। रिपोर्ट के अनुसार दोनों अधिकारियों को ₹5 lakh each की penalty का सामना करने की चेतावनी दी गई थी।

Bench ने CCTV व्यवस्था में transparency और mandatory records के रखरखाव को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा। कोर्ट की चिंता केवल footage उपलब्ध नहीं होने तक सीमित नहीं रही, बल्कि CCTV failure की सूचना और उसके repair का official record नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए।

GD Entry नहीं होने पर सवाल

कोर्ट ने विशेष रूप से पूछा कि यदि पुलिस स्टेशन का CCTV system 12 अप्रैल से खराब था तो उसकी जानकारी General Diary में क्यों दर्ज नहीं की गई। SHO की ओर से ऐसी कोई GD entry नहीं होने की जानकारी दिए जाने के बाद कोर्ट ने पुलिस के version पर सवाल उठाए।

Deoria SP ने अदालत को बताया कि उन्हें CCTV system के काम नहीं करने की जानकारी नहीं दी गई थी। कोर्ट ने इसके बाद SHO के खिलाफ की गई कार्रवाई और supervisory responsibility को लेकर भी SP से सवाल किए।

CCTV installation के ₹46.46 लाख पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने Deoria जिले के police stations में CCTV systems लगाने के लिए जारी funds के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार CCTV व्यवस्था के लिए ₹46.46 lakh की राशि जारी की गई थी।

Bench ने पूछा कि जब CCTV installation का काम पूरी तरह पूरा नहीं हुआ था तो संबंधित agency को पूरी payment क्यों जारी कर दी गई। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि ऐसी स्थिति में agency को blacklist करने के बजाय पूरा fund किस आधार पर जारी किया गया।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि SP की ओर से बताई गई कार्रवाई 14 अगस्त 2026 की थी, जबकि High Court ने इस मामले में 4 अगस्त 2026 को आदेश दिया था। Bench ने prima facie सवाल उठाया कि क्या district authorities ने Court proceedings और 4 अगस्त के order के बाद ही कार्रवाई शुरू की।

मामले की सुनवाई Justice Atul Sreedharan और Justice Divesh Chandra Samant की Division Bench के सामने हुई। फिलहाल कोर्ट के आदेश के अनुसार चारों याचियों को ₹65,000 compensation दिया जाना है और यह राशि संबंधित SHO के salary से recover की जाएगी, जबकि CCTV व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े सवाल मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

Saket Kumar

Written by Saket Kumar

नमस्ते, मैं साकेत कुमार हूँ। पिछले 4+ सालों से मैं एक डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहा हूँ। ताज़ा ख़बरों, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और ख़ासकर टेक्नोलॉजी व मोबाइल अपडेट्स को आसान शब्दों में आप तक पहुँचाना मुझे बहुत पसंद है।"

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