बिहार में जमीन की Registry Process अब पूरी तरह online और paperless कर दी गई है। 17 अगस्त से लागू हुए इस नए सिस्टम के बाद रजिस्ट्री ऑफिस में कामकाज पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है। जमीन खरीदने और बेचने वाले कई लोग अभी नई व्यवस्था को समझ नहीं पा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 17 से 20 अगस्त के बीच राज्य के 141 Registration Offices में सिर्फ 2,195 रजिस्ट्री हुईं। इसके मुकाबले 13 से 16 अगस्त के बीच 16,210 रजिस्ट्री हुई थीं। यानी नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री की संख्या में करीब 80 प्रतिशत की कमी आई।
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कातिबों की हड़ताल से भी प्रभावित हुआ काम
नई Online Land Registry व्यवस्था के विरोध में बिहार के करीब 12 हजार कातिब और डीड राइटर हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि आम लोगों को नए सिस्टम को समझने में परेशानी हो रही है।
कई लोग इस बात को लेकर भी परेशान हैं कि अब दस्तावेजों पर पहले की तरह सभी लोगों के हस्ताक्षर नहीं होंगे। इसके अलावा OTP और E-Signature को लेकर भी कुछ लोगों के मन में डर बना हुआ है।
Online Registry कैसे हो रही है?

नई व्यवस्था में जमीन की रजिस्ट्री के लिए e-Nibandhan Portal पर जानकारी भरनी होती है। खरीदार और विक्रेता की जानकारी के साथ आधार, PAN और गवाहों की जानकारी online दर्ज की जाती है।
इसके बाद जरूरी payment किया जाता है और OTP के जरिए authentication पूरा होता है। फिर अपनी सुविधा के अनुसार Registry Appointment Slot बुक किया जा सकता है।
एक व्यक्ति ने बताया कि उसने पूरी प्रक्रिया खुद online पूरी की और रजिस्ट्री ऑफिस पहुंचने के कुछ ही समय में काम पूरा हो गया। उसके मुताबिक नया सिस्टम सही तरीके से इस्तेमाल करने पर काफी आसान है।
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सरकार ने बताई Paperless Registry की वजह
सरकार का कहना है कि Paperless Registry से रजिस्ट्री का काम ज्यादा तेज और पारदर्शी होगा। Digital documents होने से कागज खोने या खराब होने का खतरा कम होगा। साथ ही फर्जी दस्तावेज और duplicate registry जैसी समस्याओं पर भी रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
सरकार के अनुसार कातिबों की भूमिका भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उन्हें service provider के तौर पर काम करने का मौका दिया गया है और दस्तावेज की राशि के हिसाब से commission भी तय किया गया है।
बिहार में नई Land Registration System को लेकर फिलहाल लोगों और कातिबों के बीच असमंजस बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह सिस्टम जमीन खरीदने-बेचने वालों के लिए कितना आसान साबित होता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
