छपरा-मांझी-दरौली-गुठनी सड़क परियोजना पर काम तेज किया जा रहा है। करीब 72.18 किलोमीटर लंबी इस सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण पर लगभग 701.26 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सड़क बनने के बाद सारण और सीवान के कई इलाकों को उत्तर प्रदेश के देवरिया, गोरखपुर और आगे मऊ क्षेत्र से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
यह परियोजना बिहार स्टेट हाईवे प्रोजेक्ट-4 के तहत विकसित की जा रही है। सड़क का बड़ा हिस्सा सीवान जिले में और बाकी हिस्सा सारण जिले में आता है। इसका उद्देश्य पुराने और व्यस्त मार्ग को बेहतर बनाकर लोगों के आवागमन को आसान करना है।
72.18 किलोमीटर में होगा सड़क का विकास
छपरा-मांझी-दरौली-गुठनी पथ की कुल लंबाई 72.183 किलोमीटर है। परियोजना में सड़क के चौड़ीकरण और मजबूती के साथ पुल-पुलिया, रेलवे अंडरपास और जरूरी बाईपास का निर्माण भी शामिल है।
सरकार ने इस परियोजना के लिए 701 करोड़ 25 लाख 89 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। परियोजना को एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी ADB की वित्तीय सहायता से विकसित किया जा रहा है और इसके क्रियान्वयन में बिहार राज्य पथ विकास निगम की भूमिका है।
10 मीटर तक चौड़ी होगी सड़क
परियोजना के तहत सड़क को बेहतर मानकों के साथ विकसित किया जाना है। कई हिस्सों में सड़क की चौड़ाई करीब 10 मीटर तक किए जाने की योजना है, जिससे वाहनों की आवाजाही सुचारु हो सकेगी और बाजार क्षेत्रों में जाम की समस्या कम करने में मदद मिलेगी।
यह सड़क मांझी में एनएच-19 से जुड़ती है और गुठनी क्षेत्र में राम-जानकी पथ से कनेक्टिविटी देती है। इस रूट के विकसित होने से छपरा, मांझी, सिसवन, रघुनाथपुर, आंदर, दरौली और गुठनी क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
इन बाजारों को मिलेगा फायदा
नई सड़क से मांझी, ताजपुर, सिसवन, रघुनाथपुर, पतार, दरौली, टड़वा और गुठनी जैसे प्रमुख बाजारों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। बेहतर सड़क से माल ढुलाई, यात्री परिवहन और स्थानीय कारोबार के लिए समय और परिवहन लागत कम होने की संभावना है।
स्थानीय स्तर पर कारोबार बढ़ने के साथ सड़क किनारे नए दुकान, सर्विस सेंटर, परिवहन और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां विकसित हो सकती हैं। इससे आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है।
देवरिया और गोरखपुर तक कनेक्टिविटी होगी आसान
यह सड़क घाघरा नदी के उत्तर की ओर से गुजरते हुए बिहार के छपरा और सीवान क्षेत्र को उत्तर प्रदेश के देवरिया और गोरखपुर जैसे शहरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे बिहार के लोगों के लिए उत्तर प्रदेश की ओर आने-जाने का वैकल्पिक और बेहतर मार्ग उपलब्ध होगा।
सड़क के पूरा होने के बाद सीवान के सिसवन, रघुनाथपुर, दरौली और गुठनी क्षेत्र से गोरखपुर की यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है। इसी तरह छपरा और आसपास के लोगों को भी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक पहुंचने में फायदा मिलेगा।
सितंबर 2025 में हुआ था शिलान्यास
इस परियोजना का शिलान्यास सितंबर 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अन्य स्टेट हाईवे परियोजनाओं के साथ किया था। उस समय छपरा एवं सीवान जिले में 72.18 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण की परियोजना की लागत 701 करोड़ 26 लाख रुपये बताई गई थी।
इससे पहले जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री की प्रगति यात्रा के दौरान भी इस सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण की योजना की समीक्षा की गई थी। अधिकारियों को महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में काम तेज करने और उन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।
ताजपुर पुल भी अहम हिस्सा
मांझी-दरौली-गुठनी मार्ग पर ताजपुर के पास दाहा नदी का पुल भी इस रूट के लिए महत्वपूर्ण है। मई 2026 में सारण के जिलाधिकारी ने यहां बने सड़क पुल का निरीक्षण कर उसकी स्थिति और सुरक्षा का जायजा लिया था।
सितंबर 2026 में ताजपुर का पुराना पुल जलस्तर बढ़ने के कारण भी चर्चा में रहा। ऐसे में इस पूरे कॉरिडोर के सड़क और पुल ढांचे को बेहतर करना स्थानीय आवागमन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निर्माण से व्यापार और रोजगार को बढ़ावा
नई सड़क से ग्रामीण क्षेत्रों को बड़े बाजारों से जोड़ने में मदद मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा असर कृषि उत्पादों, स्थानीय कारोबार, छोटे उद्योगों और परिवहन सेवाओं पर पड़ सकता है।
सड़क के निर्माण के दौरान भी स्थानीय स्तर पर श्रमिकों और विभिन्न सेवाओं से जुड़े लोगों को काम मिलने की संभावना है। निर्माण पूरा होने के बाद सड़क के आसपास व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने से लंबे समय में रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।
फिलहाल परियोजना पर निर्माण और विकास से जुड़े कार्य आगे बढ़ाए जा रहे हैं। 72.18 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के पूरा होने के बाद छपरा से सीवान के रास्ते गुठनी और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों तथा मालवाहक वाहनों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
