पटना नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली बढ़ाने के लिए 15 दिन का विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान में करीब 6 लाख बिजली उपभोक्ताओं के डेटा की मदद से उन संपत्तियों को खोजा जाएगा, जो अभी तक नगर निगम के टैक्स रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं।
इसके साथ ही करीब 4,000 अपार्टमेंट और दूसरी इमारतों का दोबारा असेसमेंट किया जाएगा। नगर निगम का फोकस नई संपत्तियों को टैक्स के दायरे में लाने, गलत असेसमेंट को ठीक करने और बकाया टैक्स की वसूली पर है।
6 लाख बिजली उपभोक्ताओं के डेटा से होगी जांच
नगर निगम को बिजली विभाग से करीब 6 लाख बिजली उपभोक्ताओं की जानकारी मिली है। निगम की टीमें इन उपभोक्ताओं से संपर्क कर यह पता करेंगी कि उनके घर या संपत्ति का प्रॉपर्टी टैक्स असेसमेंट हुआ है या नहीं।
अगर किसी संपत्ति का टैक्स असेसमेंट नहीं हुआ है तो उसे नियम के अनुसार टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। इस तरह बिजली कनेक्शन और नगर निगम के प्रॉपर्टी रिकॉर्ड के बीच के अंतर को कम करने की कोशिश की जा रही है।
बिजली उपभोक्ता और दर्ज संपत्तियों में बड़ा अंतर
| जानकारी | संख्या |
|---|---|
| बिजली उपभोक्ता | करीब 6 लाख |
| नगर निगम रिकॉर्ड में दर्ज संपत्तियां | करीब 3.06 लाख |
| पहचान की जाने वाली संभावित नई संपत्तियां | अभियान के दौरान जांच |
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार बिजली उपभोक्ताओं की संख्या और टैक्स रिकॉर्ड में दर्ज संपत्तियों की संख्या में काफी अंतर है। इसी अंतर को देखते हुए बिजली डेटा का इस्तेमाल करके नई संपत्तियों की पहचान की जा रही है।
4,000 अपार्टमेंट का होगा री-असेसमेंट
नगर निगम मुख्यालय ने करीब 4,000 अपार्टमेंट और इमारतों की सूची तैयार की है। इन संपत्तियों का दोबारा असेसमेंट किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि उन पर सही तरीके से प्रॉपर्टी टैक्स लगाया गया है या नहीं।
कुछ मामलों में एक ही बिल्डिंग के अलग-अलग फ्लैट का टैक्स अलग-अलग रोड कैटेगरी के आधार पर तय पाया गया है। इससे टैक्स की गणना में अंतर हो सकता है।
री-असेसमेंट के दौरान संपत्ति का वास्तविक इस्तेमाल, क्षेत्रफल, रोड कैटेगरी और दूसरी जरूरी जानकारी देखी जाएगी। अगर निर्माण क्षेत्र बढ़ा है या संपत्ति का इस्तेमाल बदला है तो रिकॉर्ड को उसी के अनुसार अपडेट किया जा सकता है।
तीन टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारी
इस अभियान के लिए नगर निगम ने तीन विशेष टीमें बनाई हैं। हर टीम को अलग काम और लक्ष्य दिया गया है।
- पहली टीम टैक्स के दायरे से बाहर की नई संपत्तियों की पहचान करेगी।
- दूसरी टीम करीब 4,000 अपार्टमेंट और इमारतों का री-असेसमेंट करेगी।
- तीसरी टीम बड़े बकायेदारों से प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली करेगी।
तीनों टीमों को 15 दिन के अंदर अपना काम पूरा करने और नगर निगम मुख्यालय को प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
बड़े बकायेदारों पर भी नजर
नगर निगम के अनुसार करीब 1.5 लाख संपत्तियों पर प्रॉपर्टी टैक्स का बकाया है। इनमें 689 ऐसी संपत्तियां हैं, जिन पर एक लाख रुपये से ज्यादा का टैक्स बकाया है। कुल बकाया राशि करीब 80 करोड़ रुपये बताई गई है।
| सर्किल | लगभग बकाया |
|---|---|
| पाटलिपुत्र | ₹18.71 करोड़ |
| न्यू कैपिटल | ₹17.55 करोड़ |
| कंकड़बाग | ₹13 करोड़ |
वसूली टीम को बड़े बकायेदारों से फोन और सीधे संपर्क के जरिए टैक्स जमा कराने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर नगर निगम नियमों के तहत कार्रवाई भी कर सकता है।
मॉल और अस्पतालों की भी जांच
अभियान के दौरान बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की प्रॉपर्टी टैक्स असेसमेंट की भी जांच होगी। इसमें मॉल, निजी अस्पताल, बैंक्वेट हॉल और मार्केट कॉम्प्लेक्स जैसी बड़ी संपत्तियां शामिल हैं।
टाउन प्लानर और आर्किटेक्ट इन संपत्तियों के वास्तविक बने हुए क्षेत्रफल और इस्तेमाल की तुलना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान और नगर निगम के रिकॉर्ड से करेंगे।
गलत जानकारी मिलने पर टैक्स बढ़ सकता है
पटना नगर निगम के नियमों के अनुसार अगर किसी संपत्ति में नया निर्माण हुआ है तो उसकी जानकारी निगम को देना जरूरी है। अतिरिक्त निर्माण या इस्तेमाल में बदलाव मिलने पर प्रॉपर्टी टैक्स की दोबारा गणना की जा सकती है।
नगर निगम की वेबसाइट के अनुसार प्रॉपर्टी का असेसमेंट बिहार नगर पालिका अधिनियम और संबंधित प्रॉपर्टी टैक्स नियमों के तहत किया जाता है। नागरिक नई संपत्ति का असेसमेंट, Property ID और री-असेसमेंट जैसी सेवाएं ऑनलाइन भी देख सकते हैं।
अभियान का लक्ष्य
नगर निगम का उद्देश्य टैक्स रिकॉर्ड में छूटी संपत्तियों को जोड़ना और पहले से दर्ज संपत्तियों का सही असेसमेंट करना है। साथ ही करीब 80 करोड़ रुपये के बकाये की वसूली पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
15 दिन के इस अभियान के बाद नगर निगम को नई संपत्तियों, 4,000 अपार्टमेंट के री-असेसमेंट और बड़े बकायेदारों से हुई वसूली की रिपोर्ट तैयार करनी है। अभियान की प्रगति के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
