देश में चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद सरकार ने बाजार में राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने साफ किया है कि चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए Ethanol Program जिम्मेदार नहीं है। कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए चीनी के भंडार को शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने का फैसला किया गया है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि देश में चीनी की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर चिंता की जरूरत नहीं है। सरकार का दावा है कि त्योहारों के मौसम में भी बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहेगी और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
चीनी की कीमत बढ़ी: E20 के लिए गन्ने से Ethanol बनाने का असर? त्योहारों से पहले सरकार की चिंता
एथेनॉल उत्पादन को लेकर सरकार ने क्या कहा?
मंत्रालय के अनुसार, देश में गन्ने से बनने वाली चीनी का एक हिस्सा Ethanol Production के लिए इस्तेमाल होता है। एथेनॉल कार्यक्रम से किसानों को गन्ने की बेहतर कीमत और अतिरिक्त गन्ने का उपयोग करने में मदद मिली है। इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है।
सरकार का कहना है कि एथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी की मात्रा कुल उत्पादन की तुलना में बहुत अधिक नहीं है। एथेनॉल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों से भी हो रहा है। इसलिए केवल एथेनॉल कार्यक्रम को चीनी की कीमत बढ़ने का कारण बताना सही नहीं होगा।
सरकार के अनुसार, 2025-26 में लगभग 340 लाख Metric Ton चीनी का उत्पादन होने का अनुमान है, जबकि देश में घरेलू खपत करीब 280 से 290 लाख Metric Ton रहती है। ऐसे में उत्पादन और मांग के बीच बड़ा अंतर नहीं होने की बात कही जा रही है।
चीनी की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार का प्लान

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। वैश्विक बाजार में चीनी की आपूर्ति कम होने, कुछ देशों में उत्पादन घटने और त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने का असर भी कीमतों पर पड़ा है।
इसी वजह से सरकार ने चीनी के Import को मंजूरी देकर बाजार में सप्लाई बढ़ाने की तैयारी की है। शुल्क मुक्त आयात से बाजार में अतिरिक्त चीनी पहुंचेगी, जिससे कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि आने वाले त्योहारों के मौसम में चीनी की कमी नहीं होने दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर बाजार की स्थिति को देखते हुए आगे भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे, ताकि आम लोगों को महंगी चीनी का ज्यादा बोझ न उठाना पड़े।

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