भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार को बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त liquidity निकालने के लिए ₹5 लाख करोड़ का overnight Variable Rate Reverse Repo (VRRR) auction घोषित किया। यह कदम 30-day VRRR auction में अपेक्षा से कम participation के बाद उठाया गया, जिसमें बैंकों ने RBI के ₹7 लाख करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹2.59 लाख करोड़ की राशि ही रखी।
30-day auction में कम भागीदारी को लेकर पांच market traders ने technical glitch की जानकारी दी। हालांकि, मामले से परिचित एक व्यक्ति ने इस दावे से असहमति जताते हुए कहा कि सभी bids RBI के e-Kuber system के जरिए सफलतापूर्वक गए थे।
30-day auction में ₹2.59 लाख करोड़ की भागीदारी
RBI ने 4 सितंबर को 30-day VRRR auction की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य banking system में मौजूद रिकॉर्ड surplus liquidity को absorb करना था और इसके लिए ₹7 लाख करोड़ की राशि तय की गई थी।
इस auction में banks को अपने funds RBI के पास रखने के साथ premature reversal का option भी दिया गया था। इसका मकसद लंबे समय तक funds lock करने को लेकर बैंकों की चिंता कम करना था।
इसके बावजूद सोमवार के auction में कुल ₹2.59 लाख करोड़ की bids मिलीं। यह RBI के तय ₹7 लाख करोड़ के लक्ष्य से काफी कम था, जिसके बाद central bank ने overnight operation की घोषणा की।
Technical glitch को लेकर अलग-अलग दावे
कुछ market participants के अनुसार 30-day VRRR auction में technical problems के कारण कई banks समय पर participate नहीं कर सके। एक state-run bank के trader ने कहा, ‘E-Kuber, the usual one, had some technical issues, and hence some banks were caught unaware’.
Traders के अनुसार bidding को एक दूसरे platform पर shift करना पड़ा। इससे कुछ banks को नए arrangement के बारे में समय पर जानकारी नहीं मिल पाई और उनकी participation प्रभावित हुई।
हालांकि, मामले से परिचित एक व्यक्ति ने technical glitch की बात से इनकार किया। उसके अनुसार सभी bids RBI के e-Kuber platform से process हुईं और auction में किसी technical failure की जानकारी नहीं थी।
RBI की ओर से इस technical issue को लेकर तत्काल कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था। इसलिए auction में कम participation की वजह को लेकर market में अलग-अलग assessments बने हुए हैं।
RBI ने overnight VRRR क्यों किया
30-day operation से अपेक्षित मात्रा में liquidity absorb नहीं होने के बाद RBI ने overnight VRRR का सहारा लिया। इस नए operation में central bank ₹5 लाख करोड़ तक की liquidity absorb करने की कोशिश करेगा।
VRRR RBI के liquidity management tools में से एक है। इसमें banks अपनी अतिरिक्त funds को RBI के पास तय अवधि के लिए रखते हैं, जिससे banking system में उपलब्ध surplus money को कम करने में मदद मिलती है।
इस समय RBI के सामने बड़ी चुनौती banking system में जमा अतिरिक्त liquidity को नियंत्रित करना है। बहुत ज्यादा surplus funds short-term interest rates को नीचे ला सकते हैं और monetary policy transmission पर असर डाल सकते हैं।
Banking system में liquidity रिकॉर्ड स्तर पर
RBI के सामने liquidity की समस्या हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी है। 6 सितंबर तक banking system का liquidity surplus ₹11.6 लाख करोड़ तक पहुंच गया था, जो banking system के कुल deposits का लगभग 4 प्रतिशत था।
इससे पहले 3 सितंबर को liquidity surplus करीब ₹10.3 लाख करोड़ था। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से RBI की special foreign currency mobilisation schemes से आए बड़े inflows और उनसे जुड़े rupee liquidity creation के बाद हुई।
RBI की special measures के जरिए 31 अगस्त तक करीब $136.38 billion का foreign currency mobilisation हुआ था। इसमें लगभग $127.23 billion FCNR(B) deposits, $5.26 billion overseas foreign currency borrowings और $3.89 billion external commercial borrowings से आए थे।
RBI ने पहले भी liquidity absorption बढ़ाई
अतिरिक्त liquidity को नियंत्रित करने के लिए RBI पहले ही कई VRRR operations कर चुका है। हाल के operations में overnight से लेकर 15-day tenor तक की reverse repo facilities का इस्तेमाल किया गया है।
हालांकि, longer-duration auctions में banks की participation अक्सर कम रहती है क्योंकि banks अपने surplus funds को लंबे समय तक central bank के पास रखने से बचते हैं। इसी वजह से RBI ने 30-day operation में premature reversal का option भी दिया था।
4 सितंबर को घोषित 30-day VRRR auction को इसी बढ़ती liquidity के बीच RBI की बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा गया था। Central bank का लक्ष्य banking system से ₹7 लाख करोड़ निकालना था, लेकिन actual participation काफी कम रही।
कुल liquidity withdrawal ₹8.5 लाख करोड़ से ऊपर
सोमवार के operations के बाद RBI की कुल liquidity withdrawals ₹8.5 लाख करोड़ से अधिक हो गई हैं। हालांकि, इन operations के तहत absorb की गई रकम संबंधित maturity पूरी होने के बाद banking system में वापस आ सकती है।
इसी वजह से RBI के सामने केवल short-term liquidity absorption ही पर्याप्त समाधान नहीं है। Market participants के अनुसार central bank को surplus liquidity को लंबे समय तक manage करने के लिए दूसरे instruments का भी इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
MSS और अन्य विकल्पों पर नजर
IDFC First Bank की chief economist Gaura Sen Gupta के अनुसार liquidity के इस बड़े surplus को manage करने के लिए RBI कई instruments का combination इस्तेमाल कर सकता है। Market Stabilisation Scheme यानी MSS bonds और sell-buy swaps को संभावित विकल्पों में शामिल किया गया है।
इन उपायों का इस्तेमाल banking system से अतिरिक्त money को अधिक durable तरीके से absorb करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक option का government securities market, bond yields और RBI की balance sheet पर अलग प्रभाव हो सकता है।
बैंकिंग system में लगातार बनी रहने वाली बहुत अधिक liquidity inflation और financial assets पर भी दबाव बढ़ा सकती है। RBI की monetary policy के लिए भी यह महत्वपूर्ण है कि overnight money-market rates policy framework के अनुरूप बने रहें।
RBI के अगले कदम पर बाजार की नजर
सोमवार के overnight VRRR के बाद market participants की नजर RBI के अगले liquidity operation पर रहेगी। यदि banking system में surplus funds ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं, तो central bank एक और longer-duration reverse repo auction या अन्य liquidity absorption measures पर विचार कर सकता है।
वहीं, 30-day auction में technical glitch को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। फिलहाल RBI ने इस मुद्दे पर कोई विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है और central bank का तत्काल focus banking system में मौजूद बड़े liquidity surplus को नियंत्रित करने पर है।
