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वाराणसी में गंगा घटने के बाद सिल्ट से बढ़ी परेशानी, 84 घाटों का संपर्क टूटा; मारुति नगर में जलजमाव का विरोध

वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटने के बावजूद तटीय इलाकों की परेशानियां कम नहीं हुई हैं। गंगा में आई बाढ़ के बाद घाटों और आसपास के इलाकों में जमा सिल्ट, कीचड़ और जलजमाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जबकि 84 घाटों का आपसी संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के दौरान वाराणसी के सभी प्रमुख घाटों पर पानी पहुंच गया था। अगस्त 2026 में जलस्तर बढ़ने के कारण नावों का संचालन रोकना पड़ा और 84 घाटों का आपसी संपर्क टूट गया था।

घाटों पर सिल्ट से बढ़ी परेशानी

जलस्तर कम होने के बाद घाटों से पानी पीछे हटने लगा है, लेकिन उसके साथ बड़ी मात्रा में सिल्ट और गाद भी रह गई है। इससे घाटों की सीढ़ियों, रास्तों और आसपास के हिस्सों में सफाई की चुनौती बढ़ गई है।

वाराणसी में पिछले बाढ़ के दौरान भी पानी उतरने के बाद सिल्ट और कीचड़ की समस्या सामने आई थी। नगर निगम ने घाटों और प्रभावित मोहल्लों में सफाई के लिए पंप और सफाई कर्मचारियों की मदद से अभियान चलाया था।

अक्टूबर 2025 में नगर निगम ने 84 घाटों पर जमा सिल्ट हटाने के लिए 25 ठेकेदारों और करीब 1,200 कर्मचारियों को लगाया था। सफाई के लिए पोकलेन, जेसीबी और पंपों का भी इस्तेमाल किया गया था।

मारुति नगर में जलजमाव का मुद्दा

सामनेघाट क्षेत्र का मारुति नगर भी लंबे समय से जलनिकासी की समस्या से प्रभावित रहा है। बारिश और गंगा के बढ़े जलस्तर के दौरान नाले के जरिए पानी कॉलोनी तक पहुंचने से कई जगह जलजमाव की स्थिति बनती रही है।

मारुति नगर में पहले भी स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि कॉलोनी की कई सड़कें पानी में डूब जाती हैं और जलनिकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, नाले पर बनी पुलिया के क्षतिग्रस्त होने और जलनिकासी की समस्या के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा था।

जलजमाव और स्थानीय समस्याओं को लेकर सपा नेता की ओर से भी विरोध दर्ज कराया गया है। इस दौरान क्षेत्र में जमा पानी और लोगों को हो रही परेशानी को लेकर प्रशासन और नगर निगम से जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की गई।

सामनेघाट और आसपास के इलाकों पर असर

मारुति नगर के अलावा सामनेघाट से जुड़े दूसरे निचले इलाकों में भी गंगा के बढ़े जलस्तर का असर देखा जाता रहा है। बाढ़ के पानी के पीछे हटने के बाद सड़कों और घरों के आसपास सिल्ट जमा होने से सफाई और आवागमन की समस्या बनी रहती है।

पिछले बाढ़ के दौरान मारुति नगर, गायत्री नगर, काशीपुरम और रत्नाकर विहार जैसी कॉलोनियों में भी पानी पहुंचा था। पानी उतरने के बाद कई स्थानों पर घरों और सड़कों से सिल्ट तथा कीचड़ हटाने की जरूरत पड़ी थी।

गंगा के जलस्तर पर प्रशासन की नजर

गंगा के जलस्तर में बदलाव के बीच प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है। जलस्तर बढ़ने के दौरान जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमों को संवेदनशील इलाकों में सक्रिय किया गया था तथा सुरक्षा कारणों से नौका संचालन पर रोक भी लगाई गई थी।

17 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच नावों का संचालन बंद किया गया था और 84 घाटों का संपर्क टूट गया था। जल पुलिस और एनडीआरएफ को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया था।

सिल्ट हटाना बना बड़ी चुनौती

गंगा का पानी कम होने के बाद अब प्रभावित इलाकों में सबसे बड़ी चुनौती सिल्ट और गंदे पानी की सफाई है। सिल्ट सूखने के बाद धूल और गंदगी की समस्या भी बढ़ सकती है, जबकि जमा पानी से मच्छरों और संक्रमण का खतरा बना रहता है।

मारुति नगर में जलजमाव की समस्या नई नहीं है। स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया है कि थोड़ी बारिश के बाद भी कई जगह पानी जमा हो जाता है और जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जाती रही हैं।

फिलहाल गंगा का जलस्तर घटने के साथ बाढ़ का दबाव कम हुआ है, लेकिन 84 घाटों की कनेक्टिविटी, घाटों पर जमा सिल्ट और मारुति नगर जैसे निचले इलाकों में जलजमाव से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर लोगों की नजर है।

Sunil Singh

Written by Sunil Singh

Sunil Khusha बिहार से जुड़े समाचार, सरकारी योजनाओं, शिक्षा और रोजगार से संबंधित जानकारी पर कंटेंट लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक आसान भाषा में सटीक और उपयोगी खबरें पहुंचाना है।

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